वैश्विक पेशेवर सेवा फर्म अर्नस्ट एंड यंग (EY India) द्वारा जारी नवीनतम बैंकिंग सर्वेक्षण रिपोर्ट 'कस्टमर एक्सपीरियंस रीइमेजिंड: द न्यू फ्रंटियर फॉर इंडियन बैंकिंग इन 2026' ने भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में ग्राहकों की डिजिटल अपेक्षाओं और जमीनी हकीकत के बीच एक बड़े अंतर को उजागर किया है। इस विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, देश के लगभग 55 प्रतिशत ग्राहक अपने बैंकों द्वारा प्रदान किए जाने वाले डिजिटल सपोर्ट (मोबाइल ऐप, वेबसाइट और चैटबॉट) से पूर्ण संतुष्ट नहीं हैं और इसमें त्वरित सुधार की मांग कर रहे हैं। वहीं, आश्चर्यजनक रूप से केवल 25 प्रतिशत ग्राहकों ने ही अपने समग्र बैंकिंग अनुभव को 'उत्कृष्ट' श्रेणी में रखा है। यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि डिजिटल इंडिया के इस युग में अब केवल बुनियादी सेवाएं प्रदान करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि बैंकों को अब ग्राहक अनुभव (CX) के आधार पर अपनी रणनीतियों को फिर से तैयार करना होगा।
- डिजिटल सपोर्ट सुधार की मांग: लगभग 55% भारतीय बैंकिंग ग्राहकों का मानना है कि मोबाइल ऐप, इंटरनेट बैंकिंग और चैटबॉट के माध्यम से मिलने वाले डिजिटल सहायता तंत्र को काफी अधिक उन्नत करने की आवश्यकता है।
- अनुभव उत्कृष्टता का अभाव: सर्वेक्षण में शामिल केवल 25% (चार में से एक) ग्राहकों ने ही अपने वर्तमान बैंकों के समग्र सेवा अनुभव को उत्कृष्ट बताया है, जो दर्शाता है कि बैंकों को अपनी बुनियादी प्रक्रियाओं में सुधार करना होगा।
- वित्तीय आवश्यकताओं की समझ: लगभग 70% ग्राहकों ने माना कि उनके बैंक उनकी वित्तीय आवश्यकताओं और जीवनशैली को समझते हैं, लेकिन इन आवश्यकताओं को व्यावहारिक सेवा में बदलने के मामले में अभी भी बड़ी अड़चनें मौजूद हैं।
- री-केवाईसी (Re-KYC) का सरलीकरण: रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के नए दिशा-निर्देशों के तहत अब यदि ग्राहक की जानकारी में कोई बदलाव नहीं है, तो वे घर बैठे मोबाइल ऐप, ईमेल, एटीएम या नेट बैंकिंग के माध्यम से केवल एक स्व-घोषणा (Self-Declaration) देकर अपना री-केवाईसी पूरा कर सकते हैं।
- चैटबॉट में अविश्वास: अध्ययन से पता चलता है कि देश में चैटबॉट का उपयोग अभी भी बहुत कम है और ग्राहक अपनी वित्तीय समस्याओं के समाधान के लिए स्वचालित रोबोटिक प्रणालियों के बजाय असली इंसानों से बात करना अधिक पसंद करते हैं।
ईवाई (EY) रिपोर्ट 2026: भारतीय बैंकिंग में ग्राहक अनुभव (CX) की नई क्रांति
भारतीय बैंकिंग क्षेत्र वर्तमान में एक गहरे बदलाव के दौर से गुजर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में जनधन खातों की बाढ़, यूपीआई पेमेंट क्रांति और मोबाइल डेटा की आसान उपलब्धता ने आम भारतीयों के वित्तीय व्यवहार को पूरी तरह बदल दिया है। ईवाई इंडिया (EY India) द्वारा मई 2026 में जारी की गई रिपोर्ट ‘Customer Experience Reimagined: The New Frontier for Indian Banking in 2026’ इस बदलाव का बारीकी से विश्लेषण करती है। यह रिपोर्ट देश के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों, आय समूहों और आयु वर्गों के कुल 2,030 बैंकिंग ग्राहकों के विस्तृत सर्वेक्षण पर आधारित है।
इस सर्वेक्षण के परिणाम दर्शाते हैं कि उत्पाद (Products) और ब्याज दरें (Pricing) अब ग्राहकों के लिए किसी बैंक को चुनने का प्राथमिक आधार नहीं रह गए हैं। आज के प्रतिस्पर्धी बाजार में लगभग सभी सरकारी और निजी बैंकों के पास लगभग एक जैसी ब्याज दरें और वित्तीय योजनाएं हैं। ऐसी स्थिति में, बैंकों के सामने खुद को अलग साबित करने का एकमात्र जरिया ग्राहक अनुभव (Customer Experience) ही बचा है। हालांकि, रिपोर्ट ने एक बड़े अंतर की ओर इशारा किया है। जहां 88% ग्राहक खाता खोलने की प्रक्रिया को आसान मानते हैं, वहीं केवल 25% ग्राहक ही अपनी समग्र बैंकिंग यात्रा को उत्कृष्ट श्रेणी में रखते हैं। इसका अर्थ यह है कि बैंकों को खाता खोलने की तात्कालिक सुविधा के बाद मिलने वाली दैनिक सेवाओं, शिकायत निवारण और डिजिटल नेविगेशन पर बहुत काम करने की जरूरत है।
बैंकिंग सेक्टर में डिजिटल सपोर्ट की भारी मांग और एआई (AI) की बढ़ती भूमिका
स्मार्टफोन के बढ़ते उपयोग और इंटरनेट की आसान पहुंच ने ग्राहकों को हर काम तुरंत करने का आदी बना दिया है। यही कारण है कि सर्वेक्षण में शामिल 55% ग्राहकों ने डिजिटल सपोर्ट प्रणालियों में तत्काल सुधार की वकालत की है। वर्तमान में, कई बैंकों के पास जटिल मोबाइल ऐप और अनुपयोगी चैटबॉट प्रणालियां हैं, जो ग्राहकों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उनके भ्रम को और बढ़ा देती हैं। ग्राहक चाहते हैं कि जब भी वे किसी ऐप या पोर्टल का उपयोग करें, तो उन्हें त्वरित, पारदर्शी और सटीक सहायता मिले, न कि लंबे समय तक प्रतीक्षा करनी पड़े।
इस समस्या के समाधान के रूप में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग की भूमिका बढ़ रही है। रिपोर्ट के अनुसार, 49% उभरते पेशेवर (Rising Professionals) और 51% मध्यम आयु वर्ग के उद्यमी (Middle-Age Entrepreneurs) अपने बैंकों से स्मार्ट डिजिटल टूल की उम्मीद करते हैं, जिनमें एआई-आधारित वित्तीय सलाह, स्वचालित बचत प्रणालियां और व्यक्तिगत बजट योजनाएं शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, महिला ग्राहकों के बीच भी डिजिटल बदलाव को लेकर सकारात्मक रुख देखा गया है। लगभग 73% कामकाजी और घरेलू महिलाएं अपने बैंकिंग प्रश्नों के समाधान के लिए एआई-संचालित वर्चुअल सहायकों (AI Assistants) के उपयोग में पूरी तरह सहज महसूस करती हैं। हालांकि, इसके विपरीत, बुजुर्ग ग्राहकों और वरिष्ठ नागरिकों (Golden Transitioners) के बीच तकनीक को लेकर अभी भी संकोच है, जहां लगभग 50% बुजुर्ग सदस्य एआई चैटबॉट के बजाय किसी बैंक कर्मचारी या वास्तविक इंसान से फोन पर बात करना पसंद करते हैं।
विविध ग्राहक वर्ग (Personas) और उनकी शाखा (Branch) उपयोगिता के बदलते पैटर्न
ईवाई इंडिया की इस रिपोर्ट की एक बड़ी खूबी यह है कि इसने भारतीय बैंकिंग ग्राहकों को केवल एक समूह के रूप में देखने के बजाय उन्हें सात विशिष्ट ग्राहक श्रेणियों (Customer Personas) में विभाजित किया है। इन श्रेणियों में शामिल हैं: आकांक्षी संघर्षकर्ता (Aspiring Strivers), उभरते पेशेवर (Rising Professionals), मध्यम आयु वर्ग के उद्यमी (Middle-age Entrepreneurs), शहरी अमीर (Mass-affluent Urbanites), ग्रामीण कोर (Rural Core), वरिष्ठ नागरिक (Golden Transitioners) और सशक्त शहरी महिलाएं। इन सभी श्रेणियों की डिजिटल समझ और भौतिक शाखाओं (Physical Branches) के उपयोग का व्यवहार एक-दूसरे से काफी अलग है।
शाखाओं के उपयोग से जुड़े आंकड़े इस प्रकार हैं:
- उद्यमी और व्यापारिक वर्ग: रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 68% मध्यम आयु वर्ग के उद्यमी नकदी लेनदेन (Cash Transactions) के लिए और 65% खाता सेवाओं व बड़े ड्राफ्ट के लिए नियमित रूप से बैंक शाखाओं का दौरा करते हैं।
- शहरी अमीर और ग्रामीण जनता: लगभग 52% शहरी अमीर (Mass-affluent) ग्राहक किसी न किसी रूप में बैंक शाखा पर निर्भर हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले 56% ग्रामीण कोर ग्राहक जमा और निकासी के लिए भौतिक शाखाओं में जाना अनिवार्य मानते हैं।
- युवा और डिजिटल-फर्स्ट पीढ़ी: इसके विपरीत, आकांक्षी संघर्षकर्ताओं (छात्रों और युवा नौकरीपेशा) में शाखा जाने की प्रवृत्ति बहुत कम है। केवल 9% युवा ही भौतिक बैंक शाखाओं में जाते हैं, और वह भी केवल अनिवार्य केवाईसी अपडेट या ऋण संबंधी महत्वपूर्ण दस्तावेजों को जमा करने के लिए।
- महिलाएं और वरिष्ठ नागरिक: देश के 45% महिला ग्राहक और लगभग 34% वरिष्ठ नागरिक अपने बैंकिंग कार्यों के लिए नियमित रूप से शाखा में जाने को सुरक्षित और आरामदायक मानते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के 33% उभरते पेशेवर और शहरी क्षेत्रों के 37% पेशेवर भी जटिल लेनदेन के लिए शाखा पर भरोसा करते हैं।
ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाना केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि अत्यधिक प्रतिस्पर्धी भारतीय बाजार में बने रहने की बुनियादी शर्त है। जो बैंक डिजिटल दक्षता के साथ-साथ मानवीय संवेदना और सहानुभूति का सही संतुलन बनाने में सफल होंगे, वे नए उत्पादों की क्रॉस-सेलिंग और लंबे समय तक ग्राहक निष्ठा (Customer Loyalty) हासिल करने के मामले में सबसे आगे रहेंगे। — प्रतीक शाह, नेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज लीडर, ईवाई इंडिया (2026)
खाता खोलने की प्रक्रिया (Onboarding) और उत्पाद स्विचिंग की चुनौतियां
बैंकों के लिए ग्राहक सेवा की शुरुआत खाता खोलने (Onboarding) की प्रक्रिया से होती है। इस मोर्चे पर भारतीय बैंकों ने उल्लेखनीय प्रगति की है। रिपोर्ट के अनुसार, देश के 88% ग्राहकों ने माना कि खाता खोलने की प्रक्रिया सुविधाजनक है। हालांकि, जब हम विभिन्न ग्राहक वर्गों के स्तर पर इस आंकड़े का विश्लेषण करते हैं, तो कई गंभीर समस्याएं सामने आती हैं। उदाहरण के लिए, युवाओं (Aspiring Strivers) के मामले में खाता खोलने की असुविधा दर सबसे अधिक है, जहां केवल 68% युवाओं को ही यह प्रक्रिया आसान लगी। उन्होंने अनावश्यक शाखा दौरों, लंबी प्रतीक्षा अवधि और बार-बार मांगे जाने वाले भौतिक दस्तावेजों को अपनी असंतुष्टि का मुख्य कारण बताया।
इसके विपरीत, ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले 84% ग्राहकों और लगभग 94% महिलाओं ने डिजिटल खाता खोलने की सुविधा को अत्यंत सरल बताया। शहरी अमीरों (Mass-Affluent Urbanites) के मामले में यह सामने आया कि केवल 49% ग्राहक ही बिना किसी शाखा दौरे के अपना खाता पूरी तरह से डिजिटल रूप से खोल पाए। इसके अलावा, एक और बड़ी चुनौती ग्राहकों द्वारा अपने वर्तमान बैंक को छोड़कर दूसरे बैंक में जाने (Product Switching) की दर है। रिपोर्ट बताती है कि 89% सुविधा दर के बावजूद लगभग आधे उभरते पेशेवरों ने पिछले एक साल में अपना मुख्य बैंकिंग उत्पाद बदल दिया। वहीं, 91% खाता खोलने की सुविधा के बावजूद 54% मध्यम आयु वर्ग के उद्यमियों ने बेहतर सुविधाओं और डिजिटल अनुभव के लालच में अपने बचत खातों को दूसरे बैंकों में स्थानांतरित कर लिया। यह साबित करता है कि केवल आसान खाता खोलना काफी नहीं है, बल्कि निरंतर जुड़ाव ही ग्राहक को रोक कर रख सकता है।
आज का भारतीय ग्राहक अत्यंत जागरूक है। डिजिटल-फर्स्ट वित्तीय कंपनियों और फिनटेक (FinTechs) ने सुविधा और गति के जो नए मानक स्थापित कर दिए हैं, वे पारंपरिक बैंकों के लिए भी बेंचमार्क बन गए हैं। बैंकों को यह समझना होगा कि यदि वे केवल 25% ग्राहकों को ही उत्कृष्ट अनुभव दे पा रहे हैं, तो बाकी 75% ग्राहकों को खोने का जोखिम हमेशा बना रहेगा। — आरती रंगराजन, पार्टनर - फाइनेंशियल सर्विसेज, ईवाई इंडिया (2026)
आरबीआई (RBI) के नए नियम: डिजिटल केवाईसी (KYC) और री-केवाईसी (Re-KYC) का सरलीकरण
डिजिटल बैंकिंग की सुरक्षा और सुविधा को बढ़ाने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India) ने हाल ही में नियमों में बड़े और महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य धोखाधड़ी को रोकना और साथ ही साथ आम जनता को बार-बार बैंक शाखाओं में जाने की परेशानी से मुक्ति दिलाना है। रिज़र्व बैंक के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, बैंकों को अपने ग्राहकों के केवाईसी विवरणों को समय-समय पर अपडेट (Re-KYC) करना अनिवार्य है, लेकिन अब इस प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल और परेशानी मुक्त बना दिया गया है।
इस नई व्यवस्था के तहत रिज़र्व बैंक ने निम्नलिखित प्रमुख नियम लागू किए हैं:
- स्व-घोषणा द्वारा ऑनलाइन री-केवाईसी: यदि ग्राहक के पते, फोन नंबर या व्यक्तिगत विवरण में कोई बदलाव नहीं हुआ है, तो उसे दोबारा बैंक शाखा में जाकर दस्तावेज देने की कोई आवश्यकता नहीं है। ग्राहक अपने पंजीकृत ईमेल, मोबाइल नंबर, नेट बैंकिंग या बैंक के आधिकारिक मोबाइल ऐप पर जाकर केवल एक डिजिटल स्व-घोषणा पत्र (Self-Declaration Form) भरकर अपना री-केवाईसी तुरंत पूरा कर सकता है।
- एटीएम (ATM) के माध्यम से नवीनीकरण: यदि ग्राहक इंटरनेट का उपयोग नहीं करता है, तो वह बैंक के किसी भी नजदीकी एटीएम पर जाकर अपने कार्ड की मदद से स्क्रीन पर दिए गए री-केवाईसी विकल्प को चुनकर स्व-घोषणा दे सकता है।
- केंद्रीय केवाईसी रिकॉर्ड्स रजिस्ट्री (CKYCR) का एकीकरण: आरबीआई ने बैंकों के लिए सेंट्रल केवाईसी रजिस्ट्री (CKYCR) का उपयोग करना अनिवार्य कर दिया है। इसके तहत जब किसी ग्राहक का केवाईसी एक बार किसी बैंक में पूरा हो जाता है, तो उसे एक 'केवाईसी आइडेंटिफायर' (KYC Identifier) जारी किया जाता है। भविष्य में किसी अन्य बैंक या वित्तीय संस्था में खाता खोलने पर ग्राहक को दोबारा दस्तावेज नहीं देने होंगे, केवल यह संख्या दर्ज करने से डेटा स्वतः सत्यापित हो जाएगा।
- वीडियो आधारित ग्राहक पहचान प्रक्रिया (V-CIP): यदि ग्राहक का पता बदल गया है या नया खाता खोलना है, तो बैंक वीडियो-केवाईसी (V-CIP) सुविधा का उपयोग कर सकते हैं। इसके तहत ग्राहक घर बैठे बैंक अधिकारी के साथ वीडियो कॉल के जरिए अपना आधार और पैन कार्ड सत्यापित करवा सकता है, जो पूर्ण रूप से वैध माना जाता है।
- बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट्स (BCs) की सहायता: ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में जहाँ इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर है, वहाँ बैंक अपने बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट्स के माध्यम से ग्राहकों के घर जाकर बायोमेट्रिक आधारित ई-केवाईसी (e-KYC) कर सकते हैं, जिससे बुजुर्गों और मनरेगा लाभार्थियों को बड़ी राहत मिली है।
पारंपरिक बैंकिंग बनाम आधुनिक डिजिटल बैंकिंग ग्राहक अनुभव (CX) व्यवस्था
डिजिटल तकनीकों के एकीकरण और नियामक सुधारों (Regulatory Reforms) ने भारतीय बैंकों के काम करने के तरीके को पूरी तरह से बदल दिया है। नीचे दिए गए चार्ट में ईवाई सर्वेक्षण के आधार पर ग्राहक संतुष्टि और डिजिटल अपेक्षाओं से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मानकों को प्रतिशत (%) में दर्शाया गया है:
इस चार्ट से स्पष्ट है कि सुविधा का स्तर बहुत ऊंचा होने के बावजूद समग्र अनुभव में उत्कृष्टता (Excellence) की दर अभी भी बहुत कम है। इसी अंतर को पाटने के लिए बैंकों द्वारा लागू की जा रही व्यवस्था और पुरानी प्रणालियों के बीच का अंतर नीचे दी गई तुलनात्मक तालिका में देखा जा सकता है:
| मूल्यांकन पैरामीटर (Parameter) | पारंपरिक बैंकिंग अनुभव व्यवस्था | 2026 ग्राहक अनुभव (CX) व्यवस्था | दर्जा संकेतक (Winner Badge) |
|---|---|---|---|
| खाता खोलने की प्रक्रिया (Onboarding) | भौतिक रूप से शाखा जाना और लंबी कागजी कार्रवाई | डिजिटल व त्वरित (88% सुविधा दर, CKYCR का उपयोग) | ▲ Leading |
| केवाईसी का नवीनीकरण (Re-KYC) | शाखा जाकर नए दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन | घर बैठे एटीएम/ऑनलाइन/स्व-घोषणा (RBI नियमों के तहत) | ▲ Leading |
| डिजिटल सपोर्ट और चैटबॉट | सीमित और कम प्रतिक्रियाशील रोबोटिक प्रणालियां | एआई-सक्षम संवेदनशील बातचीत (73% महिलाएं कम्फर्टेबल) | ▲ Leading |
| ऑफ़लाइन शाखाओं की भूमिका | दैनिक लेन-देन के लिए अनिवार्य रूप से शाखाओं पर निर्भरता | जटिल दस्तावेजीकरण और परामर्श के लिए उपयोग (Phygital) | ≈ Parity |
निष्कर्ष और आगे की राह (EXCEL फ्रेमवर्क)
ईवाई इंडिया (EY India) की यह रिपोर्ट स्पष्ट संदेश देती है कि भारतीय बैंकिंग क्षेत्र वर्तमान में एक चौराहे पर खड़ा है। बैंकों को अब अपने पारंपरिक दृष्टिकोण को छोड़कर पूरी तरह से 'डेटा-संचालित और सहानुभूति-उन्मुख' (Data-led & Empathy-driven) ग्राहक अनुभव रणनीति को अपनाना होगा। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए रिपोर्ट में EXCEL फ्रेमवर्क की सिफारिश की गई है। इस फ्रेमवर्क के पांच मुख्य स्तंभ हैं: सहानुभूति (Empathy), उत्कृष्ट क्रियान्वयन (eXecution), सुविधा (Convenience), अधिकारिता (Empowerment), और सुनना (Listening)। जब तक बैंक इन पांच सूत्रों को अपनी प्रणालियों में एकीकृत नहीं करेंगे, तब तक वे 25% की उत्कृष्टता दर को आगे नहीं बढ़ा पाएंगे। रिज़र्व बैंक के सरल केवाईसी नियमों और बढ़ती डिजिटल साक्षरता का लाभ उठाते हुए बैंकों को मोबाइल ऐप्स को सरल, चैटबॉट्स को अधिक बुद्धिमान और शाखाओं को वित्तीय सलाहकार केंद्रों के रूप में विकसित करना होगा ताकि वे देश के आर्थिक विकास में अपना सर्वोत्तम योगदान दे सकें।
सत्यापित स्रोत और संदर्भ (Attributed Sources)
इस लेख में प्रस्तुत सभी आंकड़े, नीतियां और वक्तव्य निम्नलिखित प्रमाणित व विश्वसनीय स्रोतों से सत्यापित किए गए हैं:
- अर्नस्ट एंड यंग इंडिया (ey.com/in): आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति और रिपोर्ट 'Customer Experience Reimagined: The New Frontier for Indian Banking in 2026' (मई 2026)।
- भारतीय रिज़र्व बैंक (rbi.org.in): बैंकों के लिए समय-समय पर जारी की जाने वाली मास्टर डायरेक्टिव - नो योर कस्टमर (KYC) दिशा-निर्देश और डिजिटल केवाईसी अधिसूचनाएं (2025-2026)।
- केवाईसी रजिस्ट्री सीकेवाईसीआर (CKYCR - cersai.org.in): सेंट्रल केवाईसी रिकॉर्ड्स रजिस्ट्री की परिचालन मार्गदर्शिका और साझा डेटाबेस नियम।
- ईवाई वित्तीय सेवा नेतृत्व वक्तव्य: नेशनल लीडर प्रतीक शाह और पार्टनर आरती रंगराजन द्वारा मुंबई और बेंगलुरु में आयोजित वित्तीय शिखर सम्मेलनों में दिए गए आधिकारिक भाषण।