सरकारी नौकरी और रोजगार बाजार में गिरावट: नेशनल करियर सर्विस (NCS) पोर्टल पर सक्रिय रिक्तियां 16 महीने के निचले स्तर पर, नियोक्ताओं के पंजीकरण में रिकॉर्ड वृद्धि

भारत सरकार के प्रमुख रोजगार मंच नेशनल करियर सर्विस (NCS) पोर्टल पर सक्रिय रिक्तियों में भारी गिरावट आई है। फरवरी 2026 में सक्रिय रिक्तियां घटकर 15 लाख रह गईं, जो पिछले 16 महीनों का सबसे निचला स्तर है, जबकि सक्रिय नियोक्ताओं की संख्या दोगुनी से अधिक बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। यह विरोधाभास दर्शाता है कि भारतीय श्रम बाजार में नियोक्ताओं के पंजीकरण की गति तो तेज है, लेकिन वास्तविक नौकरी विज्ञापनों में संकुचन देखा जा रहा है।

भारतीय रोजगार बाजार और करियर की चुनौतियां नेशनल करियर सर्विस पोर्टल पर सक्रिय रिक्तियों में गिरावट के बाद युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तलाशना और कौशल विकास करना बेहद जरूरी हो गया है।
मुख्य निष्कर्ष (Key Takeaways)
  • सक्रिय रिक्तियों में भारी गिरावट: नेशनल करियर सर्विस (NCS) पोर्टल पर फरवरी 2026 में कुल सक्रिय रिक्तियों की संख्या घटकर 15 लाख रह गई, जो जनवरी 2026 की 23.7 लाख रिक्तियों की तुलना में लगभग 36.7 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्शाती है।
  • 16 महीने का सबसे निचला स्तर: पोर्टल पर सक्रिय नौकरियों का यह स्तर अक्टूबर 2024 (14.12 लाख) के बाद से अब तक का सबसे निचला आंकड़ा है, जिसने बाजार विश्लेषकों का ध्यान आकर्षित किया है।
  • सक्रिय नियोक्ताओं में रिकॉर्ड वृद्धि: नौकरियों में गिरावट के विपरीत, पोर्टल पर सक्रिय नियोक्ताओं का पंजीकरण जनवरी के 71,844 से 112.9 प्रतिशत बढ़कर फरवरी 2026 में 1.53 लाख पर पहुंच गया, जो एक नया पांच महीने का उच्चतम स्तर है।
  • समानान्तर डिजिटल मंचों का प्रभाव: नौकरियों के विज्ञापन में गिरावट का एक बड़ा कारण 'ई-श्रम' (e-Shram) पोर्टल और 'स्किल इंडिया डिजिटल हब' (SIDH) जैसे समानान्तर सरकारी प्लेटफार्मों की ओर नियोक्ताओं का रुझान होना माना जा रहा है।
  • उम्मीदवारों का विशाल पंजीकरण आधार: पोर्टल पर 28 फरवरी 2026 तक सक्रिय नौकरी चाहने वाले उम्मीदवारों की संख्या 87 लाख (8.7 मिलियन) से अधिक दर्ज की गई है, जो अत्यधिक प्रतिस्पर्धा की ओर इशारा करती है।

नेशनल करियर सर्विस (NCS) पोर्टल: फरवरी 2026 के मुख्य आंकड़े और ऐतिहासिक तुलना

नेशनल करियर सर्विस (NCS) पोर्टल को भारत सरकार द्वारा वर्ष 2015 में देश भर के नियोक्ताओं और नौकरी चाहने वालों को एक ही डिजिटल मंच पर लाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। पिछले लगभग 11 वर्षों से, यह मंच भारत के संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों को बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। फरवरी 2026 में जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस मंच पर सक्रिय नौकरियों की संख्या 15 लाख रह गई है, जो जनवरी 2026 में दर्ज की गई 23.7 लाख नौकरियों की तुलना में 36.7 प्रतिशत की भारी कमी दर्शाती है।

मासिक आधार पर इतनी बड़ी गिरावट पिछले कई वर्षों में नहीं देखी गई थी। यदि हम ऐतिहासिक संदर्भ में देखें, तो अक्टूबर 2024 में पोर्टल पर सक्रिय नौकरियों का स्तर 14.12 लाख था, जो कि इस बार के आंकड़े के काफी करीब था। इसके विपरीत, पोर्टल पर पंजीकृत नौकरी चाहने वालों (Job Seekers) की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। 28 फरवरी 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, नेशनल करियर सर्विस पोर्टल पर सक्रिय रूप से पंजीकृत उम्मीदवारों की संख्या लगभग 87 लाख (8.7 मिलियन) पहुंच चुकी है। इसके अतिरिक्त, चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में 20 जनवरी 2026 तक 78.86 लाख से अधिक नए उम्मीदवारों ने इस पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराया था। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि जहां एक ओर नौकरी चाहने वालों की कतार लंबी होती जा रही है, वहीं दूसरी ओर आधिकारिक सरकारी मंच पर उपलब्ध नौकरियों की संख्या में संकुचन आ रहा है।

15 Lakh सक्रिय रिक्तियां (फरवरी 2026)
1.53 Lakh सक्रिय नियोक्ता (फरवरी 2026)
87 Lakh पंजीकृत सक्रिय उम्मीदवार
36.7% सक्रिय रिक्तियों में मासिक गिरावट

नियोक्ताओं का पंजीकरण बनाम वास्तविक भर्ती: बाजार में विरोधाभास का विश्लेषण

फरवरी 2026 के रोजगार आंकड़ों में सबसे हैरान करने वाला पहलू सक्रिय नियोक्ताओं और सक्रिय नौकरियों के बीच का तीव्र विरोधाभास है। एक ओर जहां सक्रिय नौकरियों की संख्या 36.7 प्रतिशत गिरकर 15 लाख रह गई है, वहीं दूसरी ओर पोर्टल पर सक्रिय नियोक्ताओं (Active Employers) की संख्या में 112.9 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। जनवरी 2026 में जहां पोर्टल पर 71,844 नियोक्ता सक्रिय थे, वहीं फरवरी 2026 में यह संख्या बढ़कर 1.53 लाख (1,53,000) हो गई, जो पिछले पांच महीनों का सबसे उच्च स्तर है।

इस विरोधाभास पर प्रकाश डालते हुए आर्थिक शोध संस्थान 'नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च' (NCAER) की प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और प्रोफेसर डॉ. बोरनाली भंडारी ने अपने एक विश्लेषण में कहा है कि नियोक्ताओं के पंजीकरण और वास्तविक नौकरी के विज्ञापनों के बीच एक बड़ा अंतराल है। नियोक्ताओं द्वारा पोर्टल पर पंजीकरण करना यह दर्शाता है कि वे डिजिटल सरकारी मंचों के प्रति आकर्षित हो रहे हैं और अपनी कंपनी को सत्यापित कर रहे हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे तुरंत नई भर्तियां भी निकाल रहे हैं। कई कंपनियां केवल भविष्य की आवश्यकताओं के लिए या सरकारी नियमों के अनुपालन के लिए पोर्टल पर पंजीकरण कराती हैं, जबकि वास्तविक भर्ती की प्रक्रिया वे अपने निजी चैनलों या बाहरी एजेंसियों के माध्यम से ही पूरी करती हैं। यह नीति निर्माताओं के लिए एक संकेत है कि केवल पोर्टल पर नियोक्ताओं की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें सक्रिय नौकरी पोस्टिंग करने के लिए भी प्रोत्साहित करना होगा।

"नेशनल करियर सर्विस (NCS) पोर्टल पर नियोक्ताओं के पंजीकरण में आई अचानक तेजी यह दर्शाती है कि कंपनियां सरकारी अनुपालन और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने को लेकर गंभीर हैं। हालांकि, वास्तविक नौकरी विज्ञापनों और नियोक्ताओं की संख्या में मौजूद यह बड़ा अंतर यह भी संकेत देता है कि देश के संगठित क्षेत्र में नई नियुक्तियों को लेकर अभी भी सतर्कता बरती जा रही है। हमें पोर्टल पर केवल पंजीकरण के बजाय सक्रिय नौकरी पोस्टिंग दरों पर ध्यान केंद्रित करना होगा।" — प्रो. बोरनाली भंडारी, वरिष्ठ अर्थशास्त्री - NCAER, (2026)
पंजीकरण और भर्ती का अंतर: जब कोई नियोक्ता किसी सरकारी पोर्टल पर पंजीकरण करता है, तो उसे अपनी कंपनी के पैन (PAN) और जीएसटी (GST) विवरणों का सत्यापन कराना होता है। यह एक स्थायी प्रक्रिया है। इसके विपरीत, नौकरी का विज्ञापन (Job Posting) एक अस्थाई घटना है जो व्यावसायिक आवश्यकताओं और बाजार की मांग पर निर्भर करती है। फरवरी 2026 के आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि नियोक्ता अपने प्लेटफॉर्म का आधार तो बढ़ा रहे हैं, लेकिन वर्तमान आर्थिक परिदृश्य के कारण वे नए विज्ञापनों को पोस्ट करने में संकोच कर रहे हैं।

सक्रिय रिक्तियों में गिरावट के मुख्य कारण: नीतिगत बदलाव और समानांतर मंच

NCS पोर्टल पर सक्रिय नौकरियों में आई इस कमी के पीछे केवल आर्थिक मंदी ही एकमात्र कारण नहीं है, बल्कि सरकार की अन्य डिजिटल पहलों और बाजार के बदलते रुझान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वर्तमान समय में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अधीन कई समानांतर डिजिटल प्लेटफॉर्म संचालित हो रहे हैं। इनमें 'ई-श्रम' (e-Shram) पोर्टल, जो असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए एक राष्ट्रीय डेटाबेस है, और 'स्किल इंडिया डिजिटल हब' (SIDH) प्रमुख हैं।

इन समानांतर डिजिटल मंचों के विस्तार के कारण नियोक्ताओं और नौकरी चाहने वालों का ध्यान विभाजित हुआ है। कई बड़ी कंपनियां जो पहले केवल NCS पोर्टल पर रिक्तियां पोस्ट करती थीं, अब वे 'स्किल इंडिया डिजिटल हब' जैसे प्लेटफार्मों को प्राथमिकता दे रही हैं क्योंकि वहां उन्हें पहले से प्रशिक्षित और प्रमाणित उम्मीदवार आसानी से मिल जाते हैं। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2026 में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और सेवा क्षेत्र में एक 'हायरिंग विंटर' (Hiring Winter) का प्रभाव देखा गया है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, तकनीकी बदलाव जैसे कि जनरेटिव एआई (Generative AI) के कारण हो रही पुनर्गठन की प्रक्रिया, और लागत में कटौती के कारण नए पदों के सृजन में कमी आई है। नियोक्ताओं के बीच अब 'एक्सपीरियंस पैराडॉक्स' (अनुभव का विरोधाभास) भी देखा जा रहा है, जहां वे प्रवेश स्तर (Entry-level) की नौकरियों के लिए भी पूर्व अनुभव की मांग कर रहे हैं, जिसके कारण मास-मार्केट जॉब पोर्टल्स पर पारंपरिक विज्ञापनों की संख्या कम हुई है।

समानांतर डिजिटल हब का उदय: 'स्किल इंडिया डिजिटल हब' और 'ई-श्रम' जैसे प्लेटफार्मों के आने से भर्ती प्रक्रिया अधिक केंद्रित हो गई है। नियोक्ताओं के लिए कौशल-आधारित भर्ती करना आसान हो गया है, जिससे पारंपरिक सामान्य भर्ती मंचों जैसे NCS पर पोस्ट होने वाली नौकरियों की संख्या पर सीधा असर पड़ा है। मंत्रालय अब इन दोनों मंचों को आपस में जोड़ने (Single Window Integration) की योजना बना रहा है ताकि डेटा का दोहराव न हो।

तुलनात्मक तालिका: नेशनल करियर सर्विस (NCS) पोर्टल के प्रदर्शन का मासिक विश्लेषण (FY 2025-26)

नेशनल करियर सर्विस (NCS) पोर्टल के विभिन्न प्रमुख संकेतकों का पिछले कुछ महीनों का तुलनात्मक डेटा भारतीय रोजगार बाजार की वर्तमान दिशा को समझने में मदद करता है। नीचे दी गई तालिका में जनवरी 2026, फरवरी 2026 और अक्टूबर 2024 के ऐतिहासिक निम्नतम स्तर का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है:

प्रमुख संकेतक (Performance Metric) अक्टूबर 2024 (Baseline Low) जनवरी 2026 (Previous Month) फरवरी 2026 (Current Month) मासिक परिवर्तन स्थिति (MoM Status)
सक्रिय रिक्तियां (Active Vacancies) 14.12 लाख 23.70 लाख 15.00 लाख ▼ 36.7% की गिरावट (16-Mo Low)
सक्रिय नियोक्ता (Active Employers) 92,500 71,844 1,53,000 ▲ 112.9% की वृद्धि (5-Mo High)
सक्रिय पंजीकृत उम्मीदवार (Job Seekers) 72 लाख 84 लाख 87 लाख ▲ 3.5% की वृद्धि (लगातार वृद्धि)
नया उम्मीदवार पंजीकरण (New Registrations) 5.8 लाख 6.9 लाख 7.2 लाख ≈ स्थिर वृद्धि (नियमित पंजीकरण)

इस तुलनात्मक तालिका से यह स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है कि रोजगार बाजार में मांग और आपूर्ति के बीच एक गंभीर असंतुलन बना हुआ है। जहां एक ओर नौकरियों की उपलब्धता में भारी गिरावट आई है, वहीं दूसरी ओर नियोक्ताओं के जुड़ाव और उम्मीदवारों के पंजीकरण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह स्थिति दर्शाती है कि बाजार में रोजगार खोजने वालों की कमी नहीं है और न ही नियोक्ताओं की रुचि में कमी आई है, बल्कि नियोक्ताओं द्वारा आधिकारिक रूप से नौकरियों को विज्ञापित करने की दर में मंदी आई है।

चार्ट विश्लेषण: भारत में रोजगार आंकड़ों का बदलता परिदृश्य

पंजीकृत उम्मीदवारों, सक्रिय नियोक्ताओं और उपलब्ध नौकरियों के इस बदलते त्रिकोणीय समीकरण को समझने के लिए विजुअल डेटा विश्लेषण अत्यंत सहायक है। सरकार के आधिकारिक डेटा के आधार पर तैयार किया गया यह चार्ट दर्शाता है कि कैसे कुल सक्रिय उम्मीदवार आधार की तुलना में रिक्तियों का अनुपात काफी कम है।

NCS पोर्टल प्रमुख संकेतक तुलना - फरवरी 2026 (लाख में)

इस चार्ट के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि श्रम बाजार में नौकरियों की प्रतिस्पर्धा किस सीमा तक बढ़ चुकी है। 87 लाख सक्रिय उम्मीदवारों के मुकाबले केवल 15 लाख नौकरियां उपलब्ध हैं, जिसका अर्थ है कि प्रत्येक उपलब्ध नौकरी के लिए औसतन लगभग 6 उम्मीदवार प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। यह अनुपात तकनीकी और सेवा क्षेत्र की नौकरियों में और भी अधिक हो जाता है। इसके विपरीत, नियोक्ताओं का बढ़ता हुआ डेटाबेस यह उम्मीद जगाता है कि यदि नीतियां अनुकूल रहीं तो भविष्य में रिक्तियों की संख्या में तेजी से सुधार हो सकता है।

रोजगार नीति पर सरकारी दृष्टिकोण और भविष्य का रोडमैप

इस गिरते आंकड़े के बीच, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और नीति निर्माताओं ने रोजगार बाजार को गति देने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। मंत्रालय की तत्कालीन सचिव सुश्री सुमिता डावरा और वर्तमान अधिकारियों के अनुसार, सरकार नेशनल करियर सर्विस पोर्टल के तकनीकी आधुनिकीकरण पर काम कर रही है। सरकार का लक्ष्य आगामी महीनों में NCS पोर्टल को अधिक सुगम बनाना और इसे पूरी तरह से स्किल इंडिया डिजिटल हब तथा देश के विभिन्न राज्य रोजगार एक्सचेंजों के साथ एकीकृत करना है। इससे नियोक्ताओं को एक ही स्थान पर सभी आवश्यक डेटा उपलब्ध हो सकेगा।

इसी संदर्भ में, केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने भी संसद में एक लिखित उत्तर में स्पष्ट किया था कि सरकार देश में रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, समय-समय पर आयोजित होने वाले 'रोजगार मेलों' के माध्यम से लाखों युवाओं को रोजगार मिला है। इसके अलावा, हालिया 'पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे' (PLFS) के आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि देश की समग्र बेरोजगारी दर जनवरी 2026 के 5.0 प्रतिशत से मामूली रूप से घटकर फरवरी 2026 में 4.9 प्रतिशत पर आ गई है। यह दर्शाता है कि भले ही आधिकारिक पोर्टल पर रिक्तियां कम दिख रही हों, लेकिन अनौपचारिक और स्थानीय बाजारों में रोजगार की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। सरकार युवाओं से अपील करती है कि वे किसी भी फर्जी जॉब पोर्टल के झांसे में न आएं और केवल आधिकारिक वेबसाइट ncs.gov.in या सरकार की राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1514 का ही उपयोग करें।

"सरकार देश के युवाओं को रोजगार के सही और सुरक्षित अवसर प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। नेशनल करियर सर्विस पोर्टल पर आंकड़ों में आने वाले उतार-चढ़ाव अस्थायी हैं, जो तकनीकी एकीकरण और बाजार के समायोजन के कारण होते हैं। हम जल्द ही एक नया एकीकृत श्रम पोर्टल लॉन्च कर रहे हैं जो नौकरियों की तलाश को और आसान बना देगा।" — डॉ. मनसुख मांडविया, केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री, (2026)
राष्ट्रीय रोजगार हेल्पलाइन 1514: यदि आप एक नौकरी चाहने वाले हैं और नेशनल करियर सर्विस पोर्टल पर पंजीकरण करने या नौकरी खोजने में किसी भी प्रकार की तकनीकी कठिनाई का सामना कर रहे हैं, तो आप सरकार की आधिकारिक टोल-फ्री हेल्पलाइन 1514 पर संपर्क कर सकते हैं। यह सेवा पूरी तरह से निःशुल्क है और कई भाषाओं में सहायता प्रदान करती है।

निष्कर्ष और नौकरी चाहने वालों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव

नेशनल करियर सर्विस (NCS) पोर्टल पर सक्रिय नौकरियों का 16 महीने के निचले स्तर 15 लाख पर पहुंचना निश्चित रूप से एक चिंताजनक संकेत है, लेकिन यह भारतीय अर्थव्यवस्था की समग्र मंदी का सूचक नहीं है। यह तकनीकी बदलावों, समानांतर डिजिटल मंचों के उदय और नियोक्ताओं की भर्ती प्राथमिकताओं में आए बदलावों का एक मिलाजुला परिणाम है। आने वाले समय में जैसे-जैसे आईटी क्षेत्र में स्थिरता आएगी और सरकारी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में तेजी आएगी, इन आंकड़ों में सुधार होने की पूरी संभावना है।

वर्तमान प्रतिस्पर्धी माहौल में नौकरी चाहने वाले युवाओं को सलाह दी जाती है कि वे केवल पारंपरिक डिग्रियों पर निर्भर रहने के बजाय अपने कौशल का विकास (Upskilling) करें। आज के बाजार में एआई (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल मार्केटिंग जैसे क्षेत्रों में कुशल उम्मीदवारों की मांग लगातार बनी हुई है। युवाओं को नेशनल करियर सर्विस पोर्टल के साथ-साथ स्किल इंडिया डिजिटल हब पर उपलब्ध मुफ्त प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों का लाभ उठाना चाहिए, ताकि वे बाजार की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप खुद को तैयार रख सकें।

संदर्भ और स्रोत (Sources & References):
  • आधिकारिक रिपोर्ट - केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार (फरवरी 2026 आंकड़े)
  • प्रेस विज्ञप्ति - पत्र सूचना कार्यालय (PIB), भारत सरकार (जनवरी-फरवरी 2026 रोजगार आंकड़े)
  • आर्थिक विश्लेषण - नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) रिपोर्ट
  • समाचार रिपोर्ट - बिजनेस स्टैंडर्ड आर्थिक समीक्षा (मार्च 2026)
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