कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) द्वारा निष्क्रिय पड़े भविष्य निधि (PF) खातों को खोजने और उन्हें दोबारा सक्रिय करने के लिए 'E-PRAAPTI' नामक डिजिटल पोर्टल लॉन्च करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया के अनुसार, इस पोर्टल के माध्यम से खाताधारक बिना किसी नियोक्ता (Employer) के हस्तक्षेप के सीधे आधार कार्ड (Aadhaar Card) के जरिए अपनी पुरानी जमाराशियों को ट्रैक और क्लेम कर सकेंगे।
- पोर्टल का नाम और स्वरूप: नए पोर्टल का नाम E-PRAAPTI (EPF Aadhaar-Based Access Portal for Tracking Inoperative Accounts) है, जो पूरी तरह से डिजिटल और यूजर-फ्रेंडली है।
- यूएएन से मुक्ति: वैसे पुराने पीएफ खाते जो यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) से लिंक नहीं हैं, उन्हें भी आधार प्रमाणीकरण (Aadhaar Authentication) के जरिए खोजा और सक्रिय किया जा सकेगा।
- ऑटो-सेटलमेंट पायलट प्रोजेक्ट: 1,000 रुपये या उससे कम राशि वाले निष्क्रिय खातों को बिना किसी आवेदन के सीधे खाताधारकों के आधार-सीडेड बैंक खातों में ट्रांसफर करने का पायलट प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक शुरू किया गया है।
- प्रथम चरण का दायरा: पहले चरण में पोर्टल मेंबर आईडी (Member ID) आधारित होगा, जबकि दूसरे चरण में उन सदस्यों को शामिल किया जाएगा जिन्हें अपनी पुरानी सदस्य आईडी याद नहीं है।
- ब्याज दरें और लाभ: वर्तमान वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ईपीएफ खातों पर 8.25% की आकर्षक ब्याज दर लागू है। वर्ष 2016 के नियमों के बाद से निष्क्रिय खातों पर भी ब्याज का लाभ जारी रहता है।
- दावा निपटान में रिकॉर्ड वृद्धि: ईपीएफओ ने वित्त वर्ष 2025-26 में 8.31 करोड़ दावों का रिकॉर्ड निपटान किया, जो पिछले वर्ष के 6.01 करोड़ से लगभग 38% अधिक है।
ई-प्राप्ति (E-PRAAPTI) पोर्टल क्या है और यह कैसे काम करेगा?
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने खाताधारकों की सुविधाओं को सुगम बनाने के लिए लगातार तकनीकी बदलाव कर रहा है। इसी दिशा में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के मार्गदर्शन में एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म E-PRAAPTI (निष्क्रिय खातों की ट्रैकिंग के लिए ईपीएफ आधार-आधारित एक्सेस पोर्टल) लॉन्च किया जा रहा है। यह पोर्टल उन कर्मचारियों के लिए वरदान साबित होगा जिनका पैसा वर्षों पुराने पीएफ खातों में फंसा हुआ है और उनके पास अपना यूएएन (Universal Account Number) नंबर नहीं है या वे उसे भूल चुके हैं। पुराने समय में जब नौकरियां बदली जाती थीं, तो नए नियोक्ता द्वारा नया पीएफ खाता खोल दिया जाता था, जिससे पुराना खाता पीछे छूट जाता था और अंततः निष्क्रिय हो जाता था।
ई-प्राप्ति पोर्टल मुख्य रूप से भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के आधार प्रमाणीकरण इंजन का उपयोग करता है। जब कोई सदस्य पोर्टल पर लॉग इन करेगा, तो उसे अपना आधार नंबर और जनसांख्यिकीय विवरण (Demographic Details) दर्ज करना होगा। सिस्टम स्वचालित रूप से ईपीएफओ के पुराने गैर-यूएएन (Non-UAN) डेटाबेस से उस विवरण का मिलान करेगा। मिलान सफल होने पर सदस्य के आधार-लिंक्ड मोबाइल नंबर पर एक वन-टाइम पासवर्ड (OTP) भेजा जाएगा। इस सुरक्षित ओटीपी सत्यापन के बाद सदस्य को उसके पुराने निष्क्रिय खातों की सूची दिखाई देगी, जिन्हें वह कुछ ही क्लिक में अपने वर्तमान सक्रिय यूएएन के साथ जोड़ सकेगा।
इस पोर्टल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह खाताधारकों को नियोक्ताओं के चक्कर काटने से पूरी तरह मुक्त करता है। ऐतिहासिक रूप से पुराने पीएफ खातों को स्थानांतरित करने या बंद करने के लिए पूर्व नियोक्ता के हस्ताक्षर, सील और भौतिक मंजूरी की आवश्यकता होती थी। कई मामलों में कंपनियां बंद हो जाती थीं या नियोक्ताओं का रवैया असहयोग का रहता था, जिससे कर्मचारी अपना पैसा निकालने से वंचित रह जाते थे। ई-प्राप्ति पोर्टल पूरी तरह से 'यूजर-ड्रिवन' (User-Driven) है। सदस्य स्वयं अपने केवाईसी (KYC) विवरण को अपडेट कर सकेंगे और नियोक्ता के हस्तक्षेप के बिना अपने वर्तमान सक्रिय यूएएन में पुरानी राशि ट्रांसफर करने का अनुरोध दर्ज कर सकेंगे।
ई-प्राप्ति पोर्टल एक सरल आधार-आधारित सत्यापन प्रणाली प्रदान करेगा। इससे खाताधारक अपने पुराने ईपीएफ खातों को सुरक्षित रूप से ट्रैक कर सकेंगे, जो यूएएन (UAN) से लिंक नहीं हैं। वे अपने प्रोफाइल को अपडेट करने और पुराने खातों को नए यूएएन से जोड़ने की प्रक्रिया को बिना किसी मध्यस्थ या नियोक्ता के पूरा कर सकेंगे। — मनसुख मांडविया, केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री, भारत सरकार (2026)
ईपीएफओ में निष्क्रिय (Inoperative) खातों की वर्तमान स्थिति: आंकड़े और विश्लेषण
भारत में नौकरी बदलने के दौरान पीएफ ट्रांसफर न कराने की प्रवृत्ति के कारण ईपीएफओ के पास निष्क्रिय खातों और बिना दावा की गई राशि का एक विशाल अंबार लग गया है। ईपीएफओ के नियमों के अनुसार, यदि किसी पीएफ खाते में लगातार 36 महीनों (3 वर्ष) तक कोई नया योगदान नहीं किया जाता है, तो उसे 'निष्क्रिय' या 'इनऑपरेटिव' (Inoperative) घोषित कर दिया जाता है। हालांकि ये खाते खाताधारक के ही रहते हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में इन पर दावा नहीं किया जाता। हाल ही में संसद और विभागीय रिपोर्टों के माध्यम से जारी किए गए आंकड़े ईपीएफओ के सामने मौजूद इस बड़ी चुनौती और उसके समाधान के प्रयासों को दर्शाते हैं।
नवीनतम सरकारी आंकड़ों (वर्ष 2026) के अनुसार, ईपीएफओ के पास वर्तमान में लगभग 31.86 लाख निष्क्रिय खाते मौजूद हैं। इन निष्क्रिय खातों में पड़ी कुल लावारिस या दावा न की गई राशि लगभग 10,903 करोड़ रुपये है। यह राशि देश के उन कामकाजी लोगों की गाढ़ी कमाई है जो अपनी नौकरी बदलने के बाद पुराने पीएफ फंड को निकालना या ट्रांसफर करना भूल गए थे। इस जमा पूंजी को सही हकदारों तक पहुंचाने के लिए ही सरकार ने ई-प्राप्ति पोर्टल जैसी पारदर्शी और अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाने का निर्णय लिया है। इन 31.86 लाख खातों में से अधिकांश खाते ऐसे हैं जिनमें खाताधारकों के नाम की स्पेलिंग में विसंगतियां हैं या उनके जन्मतिथि के रिकॉर्ड मेल नहीं खा रहे हैं।
इस विशाल निष्क्रिय कोष को कम करने के लिए ईपीएफओ ने एक विशेष रणनीति अपनाई है। संगठन ने 1,000 रुपये या उससे कम शेष राशि वाले खातों की पहचान की है। आंकड़ों के अनुसार, लगभग 7.11 लाख निष्क्रिय खाते ऐसे हैं जिनमें 1,000 रुपये या उससे कम की राशि जमा है, और इन खातों में कुल जमा राशि लगभग 30.52 करोड़ रुपये है। ईपीएफओ ने इन छोटे खातों के लिए एक ऑटो-सेटलमेंट पायलट प्रोजेक्ट (Auto-Settlement Pilot Project) शुरू किया है। इस प्रोजेक्ट के तहत खाताधारकों को कोई फॉर्म भरने की आवश्यकता नहीं होती। ईपीएफओ सीधे उनके आधार-लिंक्ड बैंक खातों में इस छोटी राशि को स्वतः ट्रांसफर कर रहा है। इसके प्रारंभिक चरण में 1.33 लाख खातों को सफलतापूर्वक बंद करके उनमें जमा लगभग 5.68 करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों को हस्तांतरित किए गए हैं।
समय-श्रृंखला विश्लेषण: ईपीएफओ (EPFO) क्लेम प्रोसेसिंग में आई अभूतपूर्व तेजी
ईपीएफओ द्वारा शुरू किए गए तकनीकी सुधारों और डिजिटलीकरण का वास्तविक प्रभाव दावों के निपटान की गति और संख्या में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) संगठन के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ है। ईपीएफओ ने इस दौरान अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया है, भौतिक दस्तावेजों की आवश्यकता को कम किया है और अधिकांश दावों को पूरी तरह से स्वचालित (Automated) कर दिया है। इससे न केवल कर्मचारियों को उनके पैसे मिलने की अवधि कम हुई है, बल्कि कार्यालयों में भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका भी समाप्त हो गई है।
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान ईपीएफओ ने रिकॉर्ड 8.31 करोड़ (83.1 मिलियन) क्लेम सेटलमेंट किए। यह संख्या पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 के 6.01 करोड़ (60.1 मिलियन) दावों के निपटान की तुलना में लगभग 38% की भारी वृद्धि को दर्शाती है। यह वृद्धि साबित करती है कि डिजिटल बदलावों के कारण संगठन की कार्यक्षमता कई गुना बढ़ गई है। इसके अलावा, सदस्यों की सुविधा के लिए चेक लीफ अपलोड करने की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप लगभग 6.68 करोड़ सदस्यों ने बिना चेक लीफ इमेज अपलोड किए सीधे ऑनलाइन क्लेम फाइल किया, जिससे उनकी क्लेम रिजेक्शन दर में उल्लेखनीय गिरावट आई है। साथ ही, लगभग 1.59 करोड़ सदस्यों ने बिना किसी नियोक्ता की मंजूरी के सीधे अपने बैंक खातों को ईपीएफ पोर्टल पर सीड किया है।
ईपीएफओ के दावों में सबसे बड़ा हिस्सा 'एडवांस निकासी' (Partial / Advance Withdrawals) का होता है, जो सदस्य अपनी विभिन्न वित्तीय आवश्यकताओं जैसे बीमारी, बच्चों की शिक्षा, विवाह या गृह निर्माण के लिए निकालते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 8.31 करोड़ दावों में से 5.51 करोड़ दावे केवल एडवांस निकासी के थे। सरकार ने इन एडवांस दावों के निपटान के लिए 'ऑटो-मोड' (Auto-Mode) लॉन्च किया है। इसके तहत पात्र दावों को बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के कंप्यूटर सिस्टम द्वारा जांचा जाता है और 3 दिनों के भीतर पैसा सीधे सदस्य के बैंक खाते में भेज दिया जाता है। वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 71.1% एडवांस दावों का निपटान इसी ऑटो-मोड के जरिए किया गया, जो पिछले वर्ष 59.19% था। इसके अलावा, 70.5 लाख ट्रांसफर क्लेम पूरी तरह से स्वतः संसाधित किए गए, और 24.8 लाख ट्रांसफर अनुरोध सदस्यों द्वारा सीधे बिना नियोक्ता हस्तक्षेप के शुरू किए गए। अप्रैल 2026 के आंकड़ों के अनुसार, अकेले उस महीने में 61.0 लाख दावे निपटाए गए, जिसमें लगभग 74% एडवांस क्लेम ऑटो-मोड में प्रोसेस हुए, और कुल 98.70% दावों का निपटान 20 दिनों के भीतर पूरा किया गया।
तुलनात्मक अध्ययन: ईपीएफओ के पुराने नियम बनाम नए ईपीएफओ 3.0 नियम
ईपीएफओ 3.0 सुधारों के लागू होने से पहले पीएफ खाताधारकों को अपने ही पैसे निकालने या ट्रांसफर करने के लिए अत्यधिक जटिल प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता था। पुराने नियमों के तहत कर्मचारी और नियोक्ता दोनों को भारी कागजी कार्रवाई करनी पड़ती थी, जिससे अक्सर दावे खारिज हो जाते थे और पैसा वर्षों तक अटका रहता था। नई नीति न केवल तकनीकी रूप से उन्नत है, बल्कि इसमें खाताधारक के हितों को सर्वोपरि रखा गया है। नीचे दी गई तुलनात्मक तालिका ईपीएफओ के पुराने नियमों और नए नियमों के अंतर को स्पष्ट रूप से दर्शाती है:
| सेवा / नियम क्षेत्र (Service Area) | पुराने ऐतिहासिक नियम (Legacy Rules) | ईपीएफओ 3.0 / नवीन नियम (EPFO 3.0 Rules) | दर्जा संकेतक (Winner Badge) |
|---|---|---|---|
| सामान्य दावा निपटान अवधि | 20 से 30 कार्यदिवस और मैन्युअल फाइलों की जांच | 3 कार्यदिवस (ऑटो-मोड के अंतर्गत अधिकांश दावे) | ▲ Leading |
| निष्क्रिय खातों को खोजने का माध्यम | नियोक्ता के जरिए क्षेत्रीय कार्यालय में भौतिक आवेदन | ई-प्राप्ति पोर्टल पर आधार प्रमाणीकरण से ऑनलाइन खोज | ▲ Leading |
| केवाईसी (KYC) और बैंक खाता लिंकिंग | पूर्व नियोक्ता के भौतिक हस्ताक्षर और ऑनलाइन मंजूरी अनिवार्य | नियोक्ता के बिना सीधे सदस्य द्वारा आधार-आधारित लिंकिंग | ▲ Leading |
| चेक लीफ अपलोड करने की आवश्यकता | दावा खारिज होने से बचने के लिए चेक की प्रति अनिवार्य थी | आधार-सत्यापित खातों के लिए चेक अपलोड पूरी तरह खत्म | ▲ Leading |
| छोटी निष्क्रिय जमाराशियों का भुगतान | खाताधारकों को स्वयं ढूंढकर क्लेम फाइल करना होता था | ₹1000 से कम राशि का सीधे बैंक खाते में ऑटो-सेटलमेंट | ▲ Leading |
| डेटाबेस और सर्वर एकीकरण | अलग-अलग क्षेत्रीय कार्यालयों के अलग सर्वर (बिखरा डेटा) | केंद्रीकृत डेटाबेस जो रीयल-टाइम अपडेट की सुविधा देता है | ≈ Parity |
ईपीएफओ 3.0 सुधारों में श्रम सचिव सुमिता डावरा और नीतिगत पहल
ईपीएफओ के इस अभूतपूर्व डिजिटल कायाकल्प के पीछे नीतिगत निर्णयों की एक लंबी श्रृंखला काम कर रही है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की सचिव सुमिता डावरा की अध्यक्षता में ईपीएफओ की कार्यकारी समिति (Executive Committee) और केंद्रीय न्यासी बोर्ड (Central Board of Trustees) की बैठकों में इस सुधार रूपरेखा को अंतिम रूप दिया गया है। सचिव डावरा ने विभिन्न समीक्षा बैठकों में ईपीएफओ को एक "तकनीक-संचालित और सदस्य-केंद्रित" (Technology-driven and Member-centric) संगठन में बदलने पर विशेष जोर दिया है। उनके नेतृत्व में तैयार किए गए विज़न डॉक्यूमेंट के अनुसार, ईपीएफओ का लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में 100% paperless और संपर्क रहित (Contactless) सेवा प्रदान करना है।
श्रम सचिव सुमिता डावरा ने ईपीएफओ की 112वीं कार्यकारी समिति की बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि दावों की अस्वीकृति दर को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए सॉफ्टवेयर में बुनियादी सुधार किए जाएं। इसी बैठक में ई-प्राप्ति पोर्टल की रूपरेखा और निष्क्रिय खातों को स्वचालित रूप से बंद करने की नीति को हरी झंडी दिखाई गई थी। संगठन अब अपने कोर बैंकिंग और आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड कर रहा है ताकि रीयल-टाइम में करोड़ों लेन-देन को बिना किसी सर्वर डाउनटाइम के संभाला जा सके। इन नीतिगत सुधारों में भविष्य निधि के हस्तांतरण की प्रक्रिया को इतना आसान बना दिया गया है कि जब कोई कर्मचारी नौकरी बदलता है, तो उसका पुराना पीएफ बैलेंस स्वतः नए नियोक्ता के खाते में स्थानांतरित हो जाता है, जिससे भविष्य में खातों के निष्क्रिय होने की संभावना ही समाप्त हो जाती है...
ईपीएफओ 3.0 के अगले चरण के सुधारों में खाताधारकों के लिए सीधे वित्तीय पहुंच के नए रास्ते खोले जा रहे हैं। श्रम मंत्रालय वर्तमान में नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और अग्रणी बैंकों के साथ विचार-विमर्श कर रहा है ताकि ईपीएफओ दावों के भुगतान को यूपीआई (UPI) नेटवर्क से जोड़ा जा सके। एक बार यह व्यवस्था लागू हो जाने के बाद, आपातकालीन चिकित्सा एडवांस जैसी छोटी राशियां सीधे सदस्य के बैंक खाते में रियल-टाइम में ट्रांसफर की जा सकेंगी, जैसे सामान्य बैंक ट्रांसफर होते हैं। इसके साथ ही, पीएफ राशि की निकासी के लिए एटीएम (ATM) आधारित डेबिट कार्ड जैसी सुविधाओं पर भी तकनीकी व्यवहार्यता अध्ययन किया जा रहा है, जो देश के ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होगा।
ईपीएफओ 3.0 सुधारों का मुख्य लक्ष्य सामाजिक सुरक्षा के दायरे को बढ़ाना और खाताधारकों के लिए 'इज ऑफ लिविंग' (सुगम जीवन) सुनिश्चित करना है। दावों के स्वतः निपटान (Auto-Settlement) और प्रक्रियाओं के सरलीकरण से अस्वीकृति दरों में बड़ी कमी आई है, जिससे करोड़ों सदस्यों को रीयल-टाइम सेवाएं दी जा रही हैं। — सुमिता डावरा, सचिव, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार (2025)
पीएफ खाताधारकों के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शिका: अपने निष्क्रिय खाते को कैसे खोजें और लिंक करें?
यदि आप भी उन कामकाजी लोगों में शामिल हैं जिन्होंने पिछले कुछ वर्षों में नौकरियां बदली हैं और पुराने नियोक्ताओं के समय का पीएफ बैलेंस ट्रांसफर नहीं किया है, तो आपको अपने इस निष्क्रिय फंड को खोजने के लिए कुछ आसान चरणों का पालन करना होगा। भारत सरकार का लक्ष्य हर कर्मचारी को उसकी जमा पूंजी सौंपना है, लेकिन इसके लिए कर्मचारियों का भी जागरूक होना आवश्यक है। नीचे दी गई प्रक्रिया का पालन करके आप ई-प्राप्ति पोर्टल और ईपीएफओ के डिजिटल टूल्स का अधिकतम लाभ उठा सकते हैं।
अपने पुराने या निष्क्रिय पीएफ खाते को खोजने और उसे वर्तमान यूएएन के साथ लिंक करने की प्रक्रिया निम्नलिखित है:
- ई-प्राप्ति पोर्टल पर जाएं: सबसे पहले ईपीएफओ की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर 'E-PRAAPTI' पोर्टल के लिंक पर क्लिक करें।
- आधार प्रमाणीकरण चुनें: पोर्टल पर अपना 12 अंकों का आधार नंबर दर्ज करें। आपके आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी (OTP) आएगा, उसे दर्ज करके प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूरी करें।
- विवरण दर्ज करें (Phase 1): यदि आपके पास पुरानी कंपनी का पीएफ खाता नंबर (Member ID) है, तो उसे दर्ज करें। यदि मेंबर आईडी उपलब्ध नहीं है, तो अपना नाम, जन्मतिथि और पूर्व नियोक्ता का नाम दर्ज करें (Phase 2)।
- निष्क्रिय खातों की सूची देखें: प्रमाणीकरण पूरा होने पर स्क्रीन पर आपके विवरण से मेल खाने वाले सभी निष्क्रिय या पुराने पीएफ खातों की सूची प्रदर्शित होगी।
- यूएएन से लिंक करने का अनुरोध भेजें: जिस खाते की राशि आप ट्रांसफर करना चाहते हैं, उसे चुनें और 'Link to UAN' बटन पर क्लिक करें। सिस्टम आपके वर्तमान सक्रिय यूएएन के साथ उसे स्वतः लिंक कर देगा।
- डिजिटल हस्तांतरण की स्थिति ट्रैक करें: अनुरोध सबमिट होने के बाद आपको एकं ट्रैकिंग नंबर मिलेगा, जिससे आप देख सकेंगे कि आपकी राशि कितने दिनों में स्थानांतरित हो गई है (सामान्यतः 7 कार्यदिवसों के भीतर यह प्रक्रिया पूरी हो जाती है)।
निष्कर्ष और आगे की राह
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) द्वारा ई-प्राप्ति (E-PRAAPTI) पोर्टल का शुभारंभ और छोटे खातों के स्वतः भुगतान का पायलट प्रोजेक्ट भारतीय सामाजिक सुरक्षा प्रणाली में एक नए डिजिटल युग का शंखनाद है। 10,903 करोड़ रुपये की निष्क्रिय और लावारिस पड़ी धनराशि को उनके वास्तविक हकदारों तक पहुंचाना न केवल खाताधारकों को वित्तीय राहत प्रदान करेगा, बल्कि देश की बचत प्रणाली में जनता के विश्वास को भी मजबूत करेगा। यूपीआई एकीकरण और एटीएम सुविधाओं जैसे भविष्य के नवाचार इस बात के स्पष्ट संकेत हैं कि ईपीएफओ अब केवल एक सरकारी कोष प्रबंधक नहीं, बल्कि एक आधुनिक फिनटेक-सक्षम सेवा प्रदाता बनने की राह पर अग्रसर है। हर कामकाजी भारतीय का यह कर्तव्य है कि वह अपने पुराने खातों की जांच करे और इस नई पारदर्शी तकनीक का लाभ उठाकर अपनी जीवन भर की गाढ़ी कमाई को सुरक्षित करे।
सत्यापित स्रोत और संदर्भ (Attributed Sources)
इस लेख में प्रस्तुत किए गए सभी आंकड़े और वक्तव्य निम्नलिखित आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों से सत्यापित किए गए हैं:
- श्रम एवं रोजगार मंत्रालय (भारत सरकार): केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया द्वारा अप्रैल 2026 में दिए गए आधिकारिक वक्तव्य और प्रेस विज्ञप्ति।
- पत्र सूचना कार्यालय (PIB): ईपीएफओ 3.0 नीतिगत प्रगति रिपोर्ट और श्रम सचिव सुमिता डावरा के समीक्षा बैठकों के विवरण (2025-2026)।
- कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO): वित्त वर्ष 2025-26 के दावा निपटान आंकड़े, ऑटो-सेटलमेंट पायलट प्रोजेक्ट रिपोर्ट और इनऑपरेटिव खातों के नियम पुस्तिका।
- लाइव मिंट (LiveMint): "EPFO plans Aadhaar-based portal to unlock dormant PF accounts" (29 अप्रैल 2026 की विशेष रिपोर्ट)।