संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा (CSE) को दुनिया की सबसे कठिन और तनावपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक माना जाता है। इस परीक्षा की तैयारी केवल अकादमिक ज्ञान की परीक्षा नहीं है, बल्कि यह उम्मीदवार के मानसिक धैर्य, संयम और सहनशीलता की भी एक लंबी परीक्षा है। 6 मार्च 2026 को घोषित यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 के अंतिम परिणामों में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 7 हासिल करने वाले डॉ. ए आर राजा मोहिद्दीन ने तैयारी के दौरान मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा को सफलता का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ बताया है। देश भर के लाखों एस्पिरेंट्स के लिए एक मूक संकट बन चुके मानसिक तनाव, अवसाद और सामाजिक अलगाव के बीच, डॉ. राजा मोहिद्दीन का यह सफर हमें सिखाता है कि कैसे अकादमिक उत्कृष्टता के साथ-साथ मानसिक शांति का संतुलन बनाए रखकर इस कठिन परीक्षा को पास किया जा सकता है।
- मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता: सिविल सेवा परीक्षा की लंबी तैयारी के दौरान गंभीर तनाव और अवसाद से बचने के लिए मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है।
- जामिया आरसीए की ऐतिहासिक सफलता: वर्ष 2025 के परिणामों में जामिया मिलिया इस्लामिया के रेसिडेंशियल कोचिंग एकेडमी (RCA) से 38 छात्रों का चयन हुआ, जिनमें 15 महिलाएं शामिल हैं।
- लक्ष्य-उन्मुख तैयारी (Goal-oriented Study): डॉ. राजा मोहिद्दीन के अनुसार, एक कठोर दैनिक टाइमटेबल का पालन करने के बजाय साप्ताहिक या मासिक लक्ष्यों को प्राप्त करने पर ध्यान केंद्रित करना अधिक प्रभावी होता है।
- मानसिक तनाव के आंकड़े: विभिन्न अध्ययनों के अनुसार, लगभग 53.3% प्रतियोगी परीक्षा के छात्र अपने मानसिक स्वास्थ्य को 'खराब' मानते हैं और 90% से अधिक एस्पिरेंट्स चिंता (anxiety) का अनुभव करते हैं।
- हॉबी और संगीत की भूमिका: तनाव प्रबंधन के लिए पढ़ाई से इतर गतिविधियों जैसे संगीत (कर्नाटक संगीत), आउटडोर स्पोर्ट्स (टेनिस) और स्वस्थ सामाजिक दायरे को बनाए रखना अनिवार्य है।
यूपीएससी परीक्षा 2025 के परिणाम और जामिया आरसीए की ऐतिहासिक सफलता
6 मार्च 2026 को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा 2025 का अंतिम परिणाम जारी किया। इस वर्ष आयोग ने कुल 1,087 रिक्तियों के सापेक्ष 958 उम्मीदवारों को विभिन्न प्रशासनिक सेवाओं जैसे आईएएस, आईपीएस, आईएफएस और ग्रुप 'ए' व 'बी' की केंद्रीय सेवाओं के लिए अनुशंसित किया है। इन सफल उम्मीदवारों में से एक बड़ा हिस्सा दिल्ली स्थित विभिन्न कोचिंग और शैक्षणिक संस्थानों के मार्गदर्शन में तैयार हुआ। विशेष रूप से, जामिया मिलिया इस्लामिया की रेसिडेंशियल कोचिंग एकेडमी (RCA) ने इस वर्ष अपनी सफलता का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। अकादमी से कुल 38 छात्रों ने सिविल सेवा परीक्षा 2025 में अंतिम सफलता प्राप्त की है, जिनमें से 15 महिलाएं हैं।
जामिया आरसीए की इस सफलता में सबसे खास बात यह रही कि अकादमी के चार छात्रों ने देश के शीर्ष 50 रैंकर्स में अपनी जगह बनाई। इनमें ऑल इंडिया रैंक 7 हासिल करने वाले डॉ. ए आर राजा मोहिद्दीन भी शामिल हैं, जिन्होंने अकादमी के अकादमिक और सहयोगात्मक माहौल की सराहना की है। जामिया आरसीए ने पिछले तीन वर्षों में लगातार अपने प्रदर्शन में सुधार किया है, जहां 2023 में 31 चयन और 2024 में 32 चयन दर्ज किए गए थे, वहीं 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 38 हो गया। यह अकादमी न केवल मुफ्त कोचिंग और पुस्तकालय की सुविधाएं देती है, बल्कि छात्रों को एक ऐसा मानसिक सपोर्ट सिस्टम भी प्रदान करती है जो उन्हें लंबी तैयारी के दौरान अकेला महसूस होने से रोकता है।
यूपीएससी की तैयारी में यह सफलता रातों-रात नहीं मिलती। इसके पीछे वर्षों का कड़ा परिश्रम और कई बार असफलताओं का सामना करने की हिम्मत छिपी होती है। जामिया आरसीए का ढांचा इसी जुझारूपन को बढ़ावा देता है, जहां छात्र एक-दूसरे से सीखते हैं और परीक्षा के कठिन समय में एक सहयोगात्मक माहौल का निर्माण करते हैं।
डॉ. ए आर राजा मोहिद्दीन (AIR 7): एक डॉक्टर से आईएएस अधिकारी बनने का सफर
चेन्नई से ताल्लुक रखने वाले 26 वर्षीय डॉ. ए आर राजा मोहिद्दीन का सफर बेहद प्रेरणादायक है। उनके माता-पिता दोनों तमिलनाडु सरकार की शैक्षणिक सेवा में कार्यरत हैं; उनकी मां चेन्नई के आर के नगर गवर्नमेंट आर्ट्स एंड साइंस कॉलेज की प्रिंसिपल हैं और उनके पिता तंजावुर के गवर्नमेंट टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज के प्रमुख हैं। राजा मोहिद्दीन ने स्वयं 2016 में गवर्नमेंट कुड्डालोर मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया और 2022 में अपनी एमबीबीएस (MBBS) की डिग्री पूरी की। अपनी पढ़ाई के दौरान वे कोई टॉपर नहीं थे, बल्कि कक्षा के शीर्ष 10 से 20 प्रतिशत छात्रों में शामिल रहते थे। उनका सिविल सेवा की ओर झुकाव उनके मेडिकल इंटर्नशिप के दौरान हुआ, जो कि कोविड-19 महामारी के दौर में पड़ा।
महामारी के समय अस्पतालों में ड्यूटी करते हुए उन्होंने महसूस किया कि एक डॉक्टर के रूप में वे मरीजों की व्यक्तिगत रूप से सेवा कर सकते थे, लेकिन जिला प्रशासन और सरकारी अधिकारियों की भूमिका (जैसे ऑक्सीजन की आपूर्ति, अस्पताल का बुनियादी ढांचा और राहत कार्य) का प्रभाव व्यापक और नीतिगत स्तर पर होता है। इसी अनुभव ने उन्हें सिविल सेवाओं में जाने के लिए प्रेरित किया। 2022 में स्नातक होने के तुरंत बाद उन्होंने तैयारी शुरू की। अपने पहले प्रयास में वे प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) भी पास नहीं कर सके। इसके बाद 2023 में वे दिल्ली आ गए और जामिया आरसीए में दाखिला लिया। उनका यह तीसरा प्रयास था, जिसमें उन्होंने पहली बार मुख्य परीक्षा (Mains) लिखी, पहली बार साक्षात्कार (Interview) दिया और सीधे ऑल इंडिया रैंक 7 हासिल कर ली।
सिविल सेवा परीक्षा का चक्रव्यूह: कुल अंक, चरण और कठिन चयन प्रक्रिया
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा का चक्रव्यूह तीन जटिल चरणों में विभाजित है, जिसे पूरा करने में लगभग एक वर्ष का समय लगता है। प्रत्येक चरण की अपनी विशिष्ट मांग होती है और किसी भी एक चरण में असफल होने पर उम्मीदवार को पुनः शून्य से शुरुआत करनी पड़ती है, जो कि एस्पिरेंट्स के मानसिक तनाव को दोगुना कर देता है:
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): यह केवल एक छंटनी परीक्षा (Screening Stage) है, जिसके अंक अंतिम मेरिट में नहीं जुड़ते। इसमें दो वस्तुनिष्ठ (Objective) पेपर होते हैं। पेपर I सामान्य अध्ययन का होता है (200 अंक) और पेपर II सीएसएटी (CSAT - योग्यता परीक्षा) होता है, जिसमें उम्मीदवारों को न्यूनतम 33% (66 अंक) हासिल करना अनिवार्य होता है। इसमें 1/3 अंक की नकारात्मक मार्किंग होती है।
मुख्य परीक्षा (Mains): यह एक विस्तृत लिखित (Descriptive) परीक्षा है, जिसमें कुल 9 पेपर होते हैं। इनमें से दो भाषा के पेपर (पेपर ए और पेपर बी - 300-300 अंक) केवल क्वालिफाइंग होते हैं। इसके अलावा 7 मेरिट आधारित पेपर होते हैं, जिनमें निबंध (250 अंक), सामान्य अध्ययन के चार पेपर (प्रत्येक 250 अंक), और एक वैकल्पिक विषय के दो पेपर (प्रत्येक 250 अंक) शामिल हैं। मुख्य परीक्षा के कुल अंक 1750 होते हैं।
व्यक्तित्व परीक्षण (Interview): मुख्य परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले उम्मीदवारों को 275 अंकों के साक्षात्कार के लिए आमंत्रित किया जाता है। यहाँ उम्मीदवार के अकादमिक ज्ञान के बजाय उसकी निर्णय क्षमता, ईमानदारी, मानसिक सतर्कता और नैतिक नेतृत्व कौशल का आकलन किया जाता है। अंतिम मेरिट सूची कुल 2025 अंकों (1750 लिखित + 275 साक्षात्कार) के आधार पर तैयार की जाती है।
एस्पिरेंट्स में मानसिक तनाव का मूक संकट: चौंकाने वाले आंकड़े और हकीकत
यूपीएससी की तैयारी करने वाले लाखों युवाओं के बीच मानसिक स्वास्थ्य एक ऐसा विषय है जिस पर अक्सर चर्चा नहीं की जाती है। समाज और परिवारों का भारी दबाव, लंबी अवधि की अनिश्चितता और लगातार असफलता का भय छात्रों को गहरे मानसिक अवसाद की ओर धकेलता है। हालिया मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षणों के आंकड़े इस मूक संकट की भयावहता को उजागर करते हैं:
सर्वेक्षणों के अनुसार, लगभग 53.3% यूपीएससी एस्पिरेंट्स अपने मानसिक स्वास्थ्य को 'खराब' या 'अत्यंत खराब' की श्रेणी में रखते हैं। इसके अतिरिक्त, चौंकाने वाली बात यह है कि तैयारी के दौरान लगभग 90% छात्र लगातार एंग्जायटी (anxiety) का सामना करते हैं, और 79% से अधिक छात्र हल्के से लेकर गंभीर अवसाद (depression) के लक्षणों से ग्रसित रहते हैं। इस तनाव का मुख्य कारण परीक्षा का लंबा चक्र और सफलता की न्यूनतम दर (लगभग 0.1% से भी कम) है। जब छात्र अपने दोस्तों को कॉरपोरेट जगत में आगे बढ़ते और स्थिर जीवन जीते देखते हैं, तो उनके भीतर खुद को लेकर हीनभावना और असुरक्षा का जन्म होता है।
"यूपीएससी की तैयारी एक परीक्षा से अधिक एक अनिश्चितकालीन बहु-वर्षीय अभियान की तरह है। इस लंबी यात्रा में सफलता पाने के लिए सबसे पहली शर्त यह है कि आप अपने मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखें। यदि आपका मस्तिष्क शांत और स्वस्थ नहीं होगा, तो आप अपनी वास्तविक क्षमता का प्रदर्शन कभी नहीं कर पाएंगे।" — डॉ. ए आर राजा मोहिद्दीन (AIR 7), यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 (2026)
विशेष रूप से, जो छात्र अपने तीसरे, चौथे या पांचवें प्रयास में होते हैं, उनमें मानसिक तनाव का स्तर पहले प्रयास वाले छात्रों की तुलना में काफी अधिक पाया जाता है। लगातार असफल होने का डर उन्हें सामाजिक जीवन से पूरी तरह काट देता है, जो उनके मानसिक स्वास्थ्य को और अधिक नुकसान पहुंचाता है। मानसिक रोग विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा के दबाव को सामान्य मानना और इसके लक्षणों (जैसे अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, भूख न लगना) को नजरअंदाज करना छात्रों के लिए घातक साबित हो सकता है।
सफलता की अनूठी रणनीति: टाइमटेबल के बजाय लक्ष्य-उन्मुख तैयारी
इस परीक्षा की तैयारी के दौरान आम तौर पर छात्रों को 14 से 16 घंटे रोजाना पढ़ाई करने और एक कड़ा टाइमटेबल बनाने की सलाह दी जाती है। लेकिन डॉ. राजा मोहिद्दीन की रणनीति इससे बिल्कुल अलग थी। उन्होंने किसी कठोर दैनिक समय सारणी का पालन करने के बजाय लक्ष्य-उन्मुख (Goal-oriented) तैयारी पर ध्यान केंद्रित किया। उनके अनुसार, दैनिक समय सारणी बनाना अक्सर उम्मीदवारों को तनाव में डाल देता है, क्योंकि यदि किसी दिन किसी कारणवश पढ़ाई नहीं हो पाती, तो उम्मीदवार अपराधबोध (guilt) से घिर जाता है, जो उनके अगले दिन की पढ़ाई को भी प्रभावित करता है।
- साप्ताहिक और मासिक लक्ष्य: दैनिक समय के बजाय बड़े लक्ष्यों को निर्धारित करें (जैसे एक सप्ताह में लक्ष्मीकांत की राजव्यवस्था समाप्त करना)।
- सकारात्मक अपराधबोध प्रबंधन: यदि किसी दिन पढ़ाई प्रभावित होती है, तो उसके लिए खुद को कोसने के बजाय अगले दिन अतिरिक्त प्रयास करके उस लक्ष्य को पूरा करें।
- गलतियों से सीखना: केवल शिक्षकों से नहीं, बल्कि अपने साथी एस्पिरेंट्स की सफलताओं और विशेष रूप से उनकी गलतियों से सीखें कि क्या नहीं करना है।
- मूल उद्देश्य को याद रखना: हमेशा यह याद रखें कि आपने इस तैयारी की शुरुआत क्यों की थी (उनके लिए यह स्वास्थ्य क्षेत्र में जनसेवा थी)। परीक्षा को केवल एक माध्यम मानें, अंतिम लक्ष्य नहीं।
लक्ष्य-उन्मुख दृष्टिकोण एस्पिरेंट्स को अपनी गति से पढ़ने की स्वतंत्रता देता है और उनके ऊपर एक अवांछित दैनिक मानसिक दबाव नहीं बनने देता। यह रणनीति लंबे समय तक निरंतरता (consistency) बनाए रखने में मदद करती है, जो कि यूपीएससी परीक्षा को पास करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण गुण है।
मानसिक कल्याण के लिए व्यावहारिक उपाय: हॉबी, संगीत और सपोर्ट सिस्टम
तैयारी के दौरान पूरी दुनिया से कट जाना और केवल किताबों में डूबे रहना एक आम भ्रांति है। डॉ. राजा मोहिद्दीन इस विचार का कड़ा विरोध करते हैं। उनके अनुसार, परीक्षा की इस लंबी यात्रा में खुद को तरोताजा रखने के लिए एक स्वस्थ व्यक्तिगत आउटलेट का होना अनिवार्य है। उनके मामले में यह आउटलेट कर्नाटक संगीत और कीबोर्ड बजाना था। जब भी वे पढ़ाई के दबाव से थका हुआ महसूस करते थे, वे संगीत गाते थे या कीबोर्ड बजाते थे, जिससे उनके मस्तिष्क को तुरंत शांति और ऊर्जा मिलती थी।
"छात्रों में परीक्षा से संबंधित चिंता और डिप्रेशन का बढ़ना एक गंभीर मुद्दा है। तैयारी के नाम पर खुद को पूरी तरह से अलग कर लेना समस्या को बढ़ाता है। छात्रों को अपनी हॉबी, खेल और एक छोटे लेकिन सकारात्मक मित्रों के समूह के साथ जुड़े रहना चाहिए। माता-पिता को भी परिणाम के बजाय बच्चों की मानसिक स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।" — डॉ. ज्योति कपूर, वरिष्ठ मनोचिकित्सक एवं संस्थापक, मनास्थली वेलनेस (2026)
इसके अतिरिक्त, उन्होंने तैयारी के दौरान अपने दोस्तों के साथ टेनिस खेलकर शारीरिक रूप से भी खुद को सक्रिय रखा। वे मानते हैं कि उनके मित्रों का समूह (जिनमें से अधिकांश उनके मेडिकल कॉलेज के सहपाठी थे) उनके लिए एक बड़ा संबल था। उनके दोस्तों ने उनके ऊपर कभी परीक्षा का दबाव नहीं बनने दिया और बाहरी दुनिया की समस्याओं तथा वास्तविक जीवन के अनुभवों को साझा करके उन्हें जमीन से जोड़े रखा। एस्पिरेंट्स को सलाह दी जाती है कि वे अपने परिवार से लगातार संपर्क में रहें, अपने खाली समय में संतुलित भोजन लें (जैसे राजा मोहिद्दीन का कम्फर्ट फूड आंध्र भवन का गनपाउडर और घी था), और खुद को एक सकारात्मक और सहायक माहौल में घेरकर रखें।
तुलनात्मक विश्लेषण: जामिया आरसीए का पिछले 3 वर्षों का प्रदर्शन
जामिया मिलिया इस्लामिया के रेसिडेंशियल कोचिंग एकेडमी (RCA) के पिछले तीन वर्षों के यूपीएससी परीक्षा परिणामों का एक तुलनात्मक विश्लेषण नीचे दी गई तालिका में दर्शाया गया है:
| सफलता पैरामीटर (Success Parameter) | परीक्षा वर्ष 2023 | परीक्षा वर्ष 2024 | परीक्षा वर्ष 2025 | तुलनात्मक स्थिति (Status) |
|---|---|---|---|---|
| कुल चयनित छात्र (Total Selections) | 31 छात्र | 32 छात्र | 38 छात्र | ▲ Leading (ऐतिहासिक प्रदर्शन) |
| शीर्ष 50 में शामिल छात्र (Top 50 Rankers) | 2 छात्र | 2 छात्र | 4 छात्र (AIR 7, 14, 24, 29) | ▲ Leading (ऐतिहासिक प्रदर्शन) |
| सफल महिला उम्मीदवार (Selected Women) | 10 महिलाएं | 11 महिलाएं | 15 महिलाएं | ▲ Leading (ऐतिहासिक प्रदर्शन) |
| न्यूनतम आवश्यक उपस्थिति नियम | 80% उपस्थिति | 80% उपस्थिति | 80% उपस्थिति | ≈ Parity (समान नियम) |
यह तालिका दर्शाती है कि अकादमी ने न केवल चयन की संख्या में वृद्धि की है, बल्कि गुणवत्ता (शीर्ष रैंकर्स) और लैंगिक विविधता (महिला उम्मीदवारों की संख्या) के मामले में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। यह प्रगति दर्शाती है कि एक सुनियोजित, मुफ्त और सहयोगात्मक आवासीय वातावरण देश के गरीब, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्गों के छात्रों को मुख्यधारा की परीक्षाओं में समान अवसर प्रदान करने में कितना प्रभावी साबित हो सकता है।
निष्कर्ष: यूपीएससी की यात्रा में मानसिक स्वास्थ्य और मूल उद्देश्य की रक्षा
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की यह यात्रा केवल आईएएस या आईपीएस बनने की यात्रा नहीं है, बल्कि यह खुद को एक परिपक्व, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनाने की प्रक्रिया है। डॉ. ए आर राजा मोहिद्दीन का शानदार प्रदर्शन और उनके सफलता के सूत्र यह साबित करते हैं कि यदि सही रणनीतिक दृष्टिकोण, मानसिक दृढ़ता और एक जीवंत जीवनशैली को अपनाया जाए, तो इस चक्रव्यूह को बिना मानसिक शांति खोए भी भेदा जा सकता है। एस्पिरेंट्स को यह समझना होगा कि परीक्षा की सफलता जीवन का एक हिस्सा है, संपूर्ण जीवन नहीं।
तैयारी करने वाले सभी छात्रों को अंततः इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि परीक्षा में सफल होना केवल एक शुरुआत है, असली काम समाज और देश की सेवा करना है। इसलिए, तैयारी के दौरान अपने भीतर की संवेदनशीलता, मानवीय गुणों और मानसिक संतुलन को खोने न दें। जब भी आप हताश या निराश महसूस करें, अपनी हॉबी का सहारा लें, अपने प्रियजनों से बात करें और याद रखें कि आपका स्वास्थ्य और जीवन किसी भी परीक्षा की रैंक से कहीं अधिक मूल्यवान और महत्वपूर्ण है।
- संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) आधिकारिक परीक्षा परिणाम वक्तव्य - upsc.gov.in
- जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) रेसिडेंशियल कोचिंग एकेडमी (RCA) बुलेटिन
- मनास्थली वेलनेस सेंटर (Manasthali Wellness) - प्रतियोगी परीक्षाओं पर मानसिक स्वास्थ्य अध्ययन रिपोर्ट
- द इंडियन एक्सप्रेस (The Indian Express) - डॉ. राजा मोहिद्दीन का विशेष साक्षात्कार