दूरसंचार विभाग, भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया 'संचार साथी' (Sanchar Saathi) पोर्टल देश में मोबाइल सुरक्षा और साइबर धोखाधड़ी की रोकथाम के लिए एक क्रांतिकारी उपकरण साबित हो रहा है। इसके माध्यम से नागरिक अपने खोए हुए मोबाइल को देश भर में ब्लॉक करने, अपने नाम पर पंजीकृत सिम कार्डों की जांच करने और संदिग्ध धोखाधड़ी वाले संदेशों की ऑनलाइन रिपोर्ट करने में सक्षम हैं।
- खोए मोबाइल की बरामदगी: संचार साथी के अंतर्गत आने वाले CEIR (सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर) मॉड्यूल के माध्यम से देश भर में अब तक 7 लाख से अधिक खोए या चोरी हुए मोबाइलों को ट्रेस और ब्लॉक किया गया है।
- फर्जी सिम की पहचान: TAFCOP मॉड्यूल की मदद से नागरिक यह देख सकते हैं कि उनके आधार या पहचान पत्र पर कितने मोबाइल नंबर सक्रिय हैं, और वे किसी भी अज्ञात कनेक्शन को बंद करने का अनुरोध सीधे कर सकते हैं।
- सख्त साइबर कार्रवाई: नागरिक रिपोर्टिंग पोर्टल Chakshu (चक्षु) के माध्यम से मिले 7.7 लाख से अधिक इनपुट के आधार पर सरकार ने 39.43 लाख से अधिक धोखाधड़ी वाले कनेक्शनों को सफलतापूर्वक बंद कर दिया है।
- डिवाइस ब्लैकलिस्टिंग: दूरसंचार नेटवर्क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए देश भर में 2.27 लाख से अधिक मोबाइल हैंडसेट और 1.31 लाख से अधिक संदिग्ध एसएमएस (SMS) टेम्पलेट्स को ब्लॉक या ब्लैकलिस्ट किया गया है।
- एकल खिड़की समाधान: यह पोर्टल नागरिकों को बिना किसी पुलिस स्टेशन के चक्कर काटे या टेलीकॉम ऑपरेटरों के कार्यालय जाए सीधे ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने और ट्रैक करने की सुविधा प्रदान करता है।
भारत में बढ़ती डिजिटल कनेक्टिविटी के साथ-साथ दूरसंचार-आधारित साइबर वित्तीय धोखाधड़ी (Cyber Financial Frauds) के मामलों में भी भारी उछाल देखा गया है। जालसाज अक्सर चोरी के मोबाइलों या फर्जी पहचान दस्तावेजों (Forged KYC) का उपयोग कर सिम कार्ड हासिल करते हैं, जिनका इस्तेमाल लोगों को ठगने के लिए किया जाता है। इस राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे से निपटने के लिए भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) ने 16 मई 2023 को आधिकारिक रूप से 'संचार साथी' (Sanchar Saathi) पोर्टल को राष्ट्रीय स्तर पर लॉन्च किया था। यह पोर्टल न केवल एक एकीकृत डेटाबेस का काम करता है, बल्कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित पहचान प्रणालियों जैसे कि ASTR का उपयोग करता है जो लाखों पहचान पत्रों में से चेहरों का मिलान कर फर्जी सिम कार्डों का पता लगाती हैं। वर्ष 2026 में, डिजिटल फ्रॉड के नए तरीकों के सामने आने के बाद सरकार ने इस पोर्टल पर 'चक्षु' और 'डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म' जैसी उन्नत सुविधाओं को जोड़कर इसे और अधिक नागरिक-अनुकूल बना दिया है। इसके माध्यम से भारतीय मोबाइल उपभोक्ता अब अपने घर बैठे अपनी डिजिटल संपत्तियों को सुरक्षित कर सकते हैं।
संचार साथी पोर्टल क्या है और डिजिटल सुरक्षा के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है?
संचार साथी मुख्य रूप से एक नागरिक-केंद्रित (Citizen-Centric) वेब पोर्टल है जिसे दूरसंचार प्रणालियों के दुरुपयोग को रोकने के लिए विकसित किया गया है। अतीत में, यदि किसी नागरिक का मोबाइल फोन गुम या चोरी हो जाता था, तो उसे ब्लॉक कराने के लिए पुलिस स्टेशन में मैन्युअल शिकायत दर्ज करानी पड़ती थी और फिर नेटवर्क ऑपरेटरों को अलग से संपर्क करना पड़ता था। इसी प्रकार, किसी व्यक्ति के नाम पर धोखाधड़ी से सिम कार्ड जारी होने की स्थिति में, उस व्यक्ति को इसका पता तब तक नहीं चलता था जब तक कि कोई पुलिस जांच या वित्तीय धोखाधड़ी सामने न आ जाए।
यह पोर्टल एक ही स्थान पर सभी दूरसंचार-संबंधित सुरक्षा समाधान प्रदान करता है। इसके तीन मुख्य सुरक्षा पिलर हैं: पहला CEIR, जो हैंडसेट को ब्लॉक करता है; दूसरा TAFCOP, जो सक्रिय सिमों का ब्योरा देता है; और तीसरा Chakshu, जो संदिग्ध कॉल्स और व्हाट्सएप स्पैम की रिपोर्ट दर्ज करता है। यह डिजिटल सुरक्षा प्रणाली भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) को सुरक्षित करने और आम जनता का इंटरनेट बैंकिंग प्रणालियों में विश्वास बनाए रखने के लिए अनिवार्य है।
"विभिन्न प्रकार की धोखाधड़ी जैसे कि पहचान की चोरी, फर्जी केवाईसी और बैंकिंग धोखाधड़ी मोबाइल फोन का दुरुपयोग करके की जा सकती हैं। संचार साथी पोर्टल को विशेष रूप से नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दूरसंचार क्षेत्र में सुरक्षा के नए मानक स्थापित करने के लिए विकसित किया गया है।" — अश्विनी वैष्णव, पूर्व केंद्रीय दूरसंचार और रेल मंत्री, भारत सरकार
खोया या चोरी हुआ मोबाइल कैसे ब्लॉक करें? (CEIR मॉड्यूल गाइड)
यदि आपका मोबाइल फोन कहीं खो जाता है या चोरी हो जाता है, तो सबसे बड़ा खतरा यह होता है कि उसमें मौजूद व्यक्तिगत डेटा, तस्वीरें और वित्तीय ऐप्स का दुरुपयोग हो सकता है। संचार साथी पोर्टल के CEIR (सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर) मॉड्यूल के माध्यम से आप अपने फोन को तुरंत ब्लॉक कर सकते हैं।
अपने खोए हुए मोबाइल को ब्लॉक करने की प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल बनाया गया है। इसके लिए आप इन चरणों का पालन कर सकते हैं:
- सबसे पहले अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन या ऑनलाइन पुलिस पोर्टल पर जाकर मोबाइल चोरी होने की शिकायत (FIR / Lost Report) दर्ज करें और उसकी डिजिटल कॉपी सुरक्षित कर लें।
- अपने मोबाइल सेवा प्रदाता (जैसे Jio, Airtel, Vi) से संपर्क कर चोरी हुए सिम कार्ड को ब्लॉक कराएं और उसी नंबर का नया डुप्लिकेट सिम कार्ड प्राप्त करें (क्योंकि सत्यापन ओटीपी इसी पर आएगा)।
- संचार साथी की आधिकारिक वेबसाइट (sancharsaathi.gov.in) पर जाएं और 'Block Lost/Stolen Mobile' विकल्प पर क्लिक करें।
- पोर्टल पर अपने मोबाइल की जानकारी दर्ज करें, जिसमें मोबाइल का 15-अंकीय IMEI नंबर (दोनों सिम स्लॉट के लिए), मोबाइल ब्रांड, मॉडल और खरीद का बिल (यदि उपलब्ध हो) शामिल हैं।
- पुलिस शिकायत संख्या दर्ज करें और उसकी कॉपी अपलोड करें। इसके बाद अभिभावक या मालिक की व्यक्तिगत जानकारी और नया मोबाइल नंबर (OTP सत्यापन के लिए) प्रदान करें।
- ओटीपी डालने के बाद सबमिट बटन दबाएं। आपका फोन 24 घंटे के भीतर भारत के सभी दूरसंचार नेटवर्क (IMEI-आधारित ब्लैकलिस्टिंग) पर पूरी तरह ब्लॉक हो जाएगा, जिससे चोर उसमें कोई भी नया सिम कार्ड नहीं चला पाएगा।
- मोबाइल वापस मिलने पर अनब्लॉक कैसे करें: यदि आपका फोन पुलिस द्वारा या स्वयं मिल जाता है, तो आप इसी पोर्टल पर 'Un-block Found Mobile' विकल्प पर जाकर अपनी रिक्वेस्ट आईडी और कारण डालकर इसे पुनः सक्रिय (Activate) कर सकते हैं।
आपके नाम पर कितने सिम कार्ड हैं? ऐसे पता लगाएं (TAFCOP मॉड्यूल)
भारत में दूरसंचार नियमों के अनुसार, एक व्यक्तिगत नागरिक अपने नाम पर अधिकतम 9 सक्रिय सिम कार्ड (जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों के निवासियों के लिए 6 सिम कार्ड) रख सकता है। कई बार जालसाज आपके पुराने या खोए हुए पहचान पत्र का उपयोग करके नया कनेक्शन ले लेते हैं और उसका इस्तेमाल आपराधिक गतिविधियों के लिए करते हैं।
संचार साथी का TAFCOP (टेलीकॉम एनालिटिक्स फॉर फ्रॉड मैनेजमेंट एंड कंज्यूमर प्रोटेक्शन) मॉड्यूल उपभोक्ताओं को यह सुविधा देता है कि वे अपने नाम पर चल रहे सभी सक्रिय नंबरों की सूची एक सेकंड में देख सकें। इसके लिए उपभोक्ता को केवल अपना चालू मोबाइल नंबर और ओटीपी दर्ज करना होता है।
सूची देखने के बाद यदि उपभोक्ता को कोई ऐसा नंबर मिलता है जो उसका नहीं है या जिसकी अब आवश्यकता नहीं है, तो वह उसे पोर्टल पर 'Not My Number' या 'Not Required' के रूप में चिह्नित कर सकता है। मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार, इस मॉड्यूल के तहत 3.78 करोड़ से अधिक अनुरोध दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 3.57 करोड़ से अधिक अनुरोधों को सफलता के साथ अंतिम रूप दिया गया है। यह सुरक्षा जांच हर नागरिक को हर 6 महीने में कम से कम एक बार जरूर करनी चाहिए।
संदिग्ध धोखाधड़ी और स्पैम कॉल की रिपोर्ट कैसे करें? (Chakshu मॉड्यूल)
दूरसंचार विभाग ने मार्च 2024 में संचार साथी के तहत एक नया और शक्तिशाली मॉड्यूल 'चक्षु' (Chakshu) लॉन्च किया था। यह नागरिकों को वित्तीय धोखाधड़ी, बैंक खाता बंद होने की धमकी देने वाले फर्जी संदेश, सेक्सटॉर्शन, या सरकारी अधिकारी बनकर की जाने वाली कॉल (जैसे कि नकली सीबीआई या पुलिस अधिकारी) की सीधे रिपोर्ट करने की शक्ति प्रदान करता है।
यदि आपको व्हाट्सएप, टेलीग्राम या सामान्य एसएमएस पर कोई संदिग्ध लिंक मिलता है जिसमें लॉटरी लगने, बिजली बिल काटने की धमकी या नौकरी का झांसा दिया गया हो, तो आप उसका स्क्रीनशॉट लेकर 'चक्षु' पोर्टल पर अपलोड कर सकते हैं। इसके बाद विभाग द्वारा इन नंबरों की जांच की जाती है और पुष्टि होने पर संबंधित कनेक्शन को बंद कर दिया जाता है। वर्ष 2026 के मध्य तक, इस पहल के परिणामस्वरूप 2.27 लाख मोबाइल हैंडसेट को साइबर अपराध नेटवर्क में शामिल पाए जाने के कारण ब्लैकलिस्ट किया गया है और साथ ही 1.31 लाख संदिग्ध मैसेजिंग टेम्प्लेट को ब्लॉक कर दिया गया है।
"डिजिटल सुरक्षा प्रत्येक नागरिक के लिए हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। संचार साथी केवल एक पोर्टल नहीं है, बल्कि एक पूरी सुरक्षा प्रणाली है जो हर भारतीय को बिना किसी शुल्क के खुद को तकनीकी खतरों से सुरक्षित करने के लिए पारदर्शी और आसान डिजिटल उपकरण उपलब्ध कराती है।" — ज्योतिरादित्य सिंधिया, केंद्रीय संचार मंत्री, भारत सरकार (दिसंबर 2025 लोकसभा बयान)
ऐतिहासिक तुलना: पारंपरिक शिकायत पद्धति बनाम डिजिटल संचार साथी पोर्टल
दूरसंचार धोखाधड़ी से निपटने के लिए अतीत में अपनाई जाने वाली पारंपरिक नीतियां और प्रणालियां आज के डिजिटल दौर की तुलना में काफी धीमी और जटिल थीं। नीचे दी गई तालिका दोनों प्रणालियों के बीच के प्रमुख अंतरों को स्पष्ट करती है:
| तुलना का पहलू | पारंपरिक पुलिस व ऑपरेटर प्रक्रिया | संचार साथी डिजिटल पोर्टल (2026) |
|---|---|---|
| शिकायत दर्ज करने का समय | कई दिनों का समय (मैन्युअल एफआईआर और डाक) ▼ Behind | केवल 5 से 10 मिनट में पूरी तरह ऑनलाइन ▲ Leading |
| फर्जी सिम का पता लगाना | असंभव (नागरिकों के पास जांच की कोई सीधी सुविधा नहीं) ▼ Behind | TAFCOP द्वारा तत्काल सूची और रिपोर्टिंग सुविधा ▲ Leading |
| मोबाइल हैंडसेट ब्लॉकिंग | केवल स्थानीय स्तर पर प्रयास (नेटवर्क लॉक का अभाव) ▼ Behind | देश व्यापी स्तर पर केंद्रीय ईएमईआई ब्लैकलिस्टिंग (CEIR) ▲ Leading |
| एकीकृत जांच तंत्र | विभिन्न राज्यों और पुलिस टीमों के बीच समन्वय की कमी ▼ Behind | 1,200+ बैंकों और पुलिस एजेंसियों के साथ DIP का एकीकरण ▲ Leading |
| सुरक्षा के प्रति जागरूकता | कठिन और अपर्याप्त जानकारी ▼ Behind | पूरी तरह से स्वैच्छिक और पारदर्शी प्रणाली ≈ Parity |
डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) और दूरसंचार सुरक्षा का बुनियादी ढांचा
संचार साथी की सफलता के पीछे केवल एक वेबसाइट नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बेहद जटिल तकनीकी बैकएंड कार्य करता है जिसे डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) कहा जाता है। यह विभिन्न हितधारकों (Stakeholders) जैसे कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI), बैंकों, यूपीआई भुगतान प्रदाताओं, वित्तीय संस्थानों, राज्यों की साइबर सेल, पुलिस विभागों और दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के बीच वास्तविक समय में खुफिया जानकारी साझा करने की अनुमति देता है।
जब किसी धोखाधड़ी वाले सिम को 'चक्षु' या किसी साइबर सेल द्वारा बंद किया जाता है, तो उस नंबर से जुड़े बैंक खातों, ई-वॉलेट और संबंधित मोबाइल हैंडसेट की जानकारी तुरंत डीआईपी प्लेटफॉर्म पर साझा कर दी जाती है। इससे बैंकों को उन संदिग्ध खातों को तुरंत फ्रीज करने में मदद मिलती है, जिससे साइबर अपराधी ठगी गई राशि को निकाल नहीं पाते हैं। इस एकीकृत सुरक्षा प्रणाली में वर्तमान में 1,200 से अधिक विभिन्न संगठनों को शामिल किया गया है, जिसके कारण भारत में डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी की दर में भारी गिरावट देखी जा रही है।
"दूरसंचार नेटवर्क के दुरुपयोग को रोकने और देश के नागरिकों की डिजिटल संपत्तियों की सुरक्षा के लिए संचार साथी और डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म जैसे सिस्टम का निर्माण अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह साइबर थ्रेट्स के खिलाफ एक मजबूत और व्यापक ढांचा प्रदान करता है।" — डॉ. नीरज मित्तल, सचिव, दूरसंचार विभाग (DoT), भारत सरकार
नागरिकों के लिए साइबर सुरक्षा टिप्स और महत्वपूर्ण चेतावनियां
यद्यपि सरकार ने संचार साथी के माध्यम से एक अभेद्य सुरक्षा कवच प्रदान करने का प्रयास किया है, फिर भी साइबर सुरक्षा में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी स्वयं उपभोक्ता की सतर्कता है। साइबर अपराधी प्रतिदिन नए-नए तरीके खोज रहे हैं, जिनसे बचने के लिए पाठकों को इन सुरक्षा सावधानियों का पालन करना चाहिए:
दूरसंचार विभाग या पुलिस अधिकारी बनकर की जाने वाली कॉल्स से हमेशा सावधान रहें। ध्यान रखें कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां (जैसे सीबीआई या पुलिस) कभी भी फोन कॉल या व्हाट्सएप वीडियो कॉल के माध्यम से 'डिजिटल अरेस्ट' (Digital Arrest) नहीं करती हैं और न ही पैसे ट्रांसफर करने की मांग करती हैं। यदि आपको ऐसी कोई कॉल आती है, तो बिना घबराए तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें और संचार साथी पर इसकी रिपोर्ट करें।
इसके अतिरिक्त, अपने स्मार्टफोन में किसी भी अज्ञात स्रोत से डाउनलोड किए गए मोबाइल ऐप को इंस्टॉल न करें। कभी भी किसी अनजान व्यक्ति के साथ अपने बैंक विवरण, कार्ड नंबर, या लॉगिन पासवर्ड साझा न करें। यदि आपको अपने नाम पर पंजीकृत सिम कार्ड की सूची में कोई भी संदिग्ध नंबर दिखाई देता है, तो बिना देरी किए TAFCOP पोर्टल पर जाकर तुरंत उसकी शिकायत दर्ज कराएं ताकि आपके दस्तावेज़ों का दुरुपयोग रोका जा सके।
निष्कर्ष और आगे की राह
डिजिटल युग में तकनीक जहाँ हमारे जीवन को सरल बना रही है, वहीं साइबर सुरक्षा एक अत्यंत महत्वपूर्ण चुनौती के रूप में उभरी है। संचार साथी पोर्टल इस चुनौती से निपटने में भारत सरकार का एक अत्यंत सराहनीय और मील का पत्थर साबित होने वाला कदम है। खोए हुए मोबाइल को ट्रेस करने के लिए CEIR, फर्जी सिमों की पहचान के लिए TAFCOP और फ्रॉड रिपोर्टिंग के लिए Chakshu जैसे टूल्स ने भारत के आम नागरिकों को सीधे अपने हाथों में डिजिटल सुरक्षा की कमान सौंप दी है। लाखों फर्जी सिमों का निरस्तीकरण और लाखों हैंडसेट का ब्लैकलिस्ट होना इस पोर्टल की सफलता की जीती-जागती गवाही है। भविष्य की राह में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग प्रणालियों के और अधिक एकीकरण से डिजिटल फ्रॉड होने से पहले ही उसका पता लगाया जा सकेगा। एक जागरूक डिजिटल नागरिक के रूप में, हमारा कर्तव्य है कि हम इन सुविधाओं का लाभ उठाएं, अपने डिजिटल फुटप्रिंट्स की नियमित जांच करें और सुरक्षित व विकसित भारत (Viksit Bharat@2047) के निर्माण में अपना योगदान दें।
संदर्भ और आधिकारिक स्रोत
इस लेख में प्रयुक्त सभी आंकड़े, विनियामक नियम और सरकारी निर्णय निम्नलिखित आधिकारिक स्रोतों से सत्यापित किए गए हैं:
- दूरसंचार विभाग (DoT), भारत सरकार - संचार साथी आधिकारिक सुरक्षा पोर्टल: sancharsaathi.gov.in
- पत्र सूचना कार्यालय (PIB), भारत सरकार - दूरसंचार सुरक्षा, ब्लैकलिस्ट किए गए हैंडसेट और फर्जी सिम कनेक्शनों पर आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति: pib.gov.in
- संसद प्रश्न और उत्तर (लोक सभा) - केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा दी गई आधिकारिक गवाही और दूरसंचार सुरक्षा अपडेट: sansad.in
- राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP), गृह मंत्रालय, भारत सरकार - वित्तीय धोखाधड़ी हेल्पलाइन (1930) आंकड़े: cybercrime.gov.in